आज सुबह बैठकर मैं सोच रहा था कि छोटे-छोटे काम कैसे इतने बड़े लगने लगते हैं। दीवार पर लटकी घड़ी की टिक-टिक सुनते हुए मुझे एहसास हुआ कि समस्या योजना की कमी नहीं, बल्कि शुरुआत का डर है। तो मैंने एक सरल चेकलिस्ट बनाने का फैसला किया जो किसी भी काम को आसान बना दे।
पहला कदम: तोड़ना और लिखना। जो भी काम करना है, उसे तीन छोटे हिस्सों में बाँट लो। मैंने कल एक DIY शेल्फ बनाने की सोची थी, लेकिन "शेल्फ बनाओ" लिखकर छोड़ दिया। आज सुबह मैंने लिखा: (1) माप लो और लकड़ी काटो (2) पेंच और ब्रैकेट लगाओ (3) पॉलिश करो और सजाओ। तीन छोटी लाइनें, और अचानक काम इतना मुश्किल नहीं लगा।
दूसरा कदम: समय तय करो, पर लचीला रहो। मैंने हर स्टेप के लिए 20 मिनट सेट किए, लेकिन यहीं मैंने गलती की। पहली बार जब मैंने लकड़ी काटी, माप गलत हो गया। मैंने सोचा था कि एक बार में सब हो जाएगा, लेकिन नहीं। सबक: समय सीमा रखो, पर थोड़ा बफर भी छोड़ो—गलतियाँ होती हैं और वे सीखने का हिस्सा हैं।
तीसरा कदम: आम गलती से बचो—सब कुछ परफेक्ट बनाने की कोशिश न करो। मेरे एक दोस्त ने कहा था, "अच्छा काम खत्म काम से बेहतर है।" पहले मैं सोचता था कि हर कोना चमकना चाहिए, लेकिन सच तो यह है कि शुरुआत करना ज्यादा जरूरी है। आज मैंने शेल्फ को थोड़ा टेढ़ा भी लगा दिया, पर वो काम कर रहा है और मुझे संतोष मिला।
यहाँ एक छोटी सी चेकलिस्ट है जो तुम आज आजमा सकते हो:
- एक काम चुनो जो हफ्तों से अधूरा पड़ा है।
- उसे तीन छोटे स्टेप्स में तोड़ो—हर स्टेप को अलग लाइन में लिखो।
- पहला स्टेप अभी करो, बाकी बाद में। बस शुरुआत करो।
तुम्हारे लिए एक छोटा काम: आज कोई भी एक काम लो—चाहे वो अलमारी साफ करना हो या मेल का जवाब देना—और उसके सिर्फ तीन स्टेप लिखो। सिर्फ लिखो, करना नहीं है। देखना, कितना हल्का महसूस होगा।
खिड़की के बाहर चिड़िया की आवाज़ आ रही है। धूप हल्की सी गर्म है, और मैं सोच रहा हूँ कि छोटे-छोटे कदम ही आगे ले जाते हैं। आज का दिन अच्छा रहा।
#कैसेकरें #DIY #चेकलिस्ट #उत्पादकता #आसानतरीके