सुबह साढ़े पांच बजे की ठंडी हवा में पार्क में दौड़ते समय मैंने देखा कि कोहरा अभी भी घास पर जमा था। हर सांस में ठंडक महसूस हो रही थी, लेकिन पांच किलोमीटर पूरे करने के बाद शरीर में वह गर्माहट आ गई जो मुझे हमेशा याद दिलाती है कि अनुशासन ही सब कुछ है।
आज का वर्कआउट:
- 5 किमी रनिंग (28 मिनट)
- 50 पुश-अप्स (4 सेट्स)
- प्लैंक होल्ड (3 मिनट कुल)
- स्ट्रेचिंग (10 मिनट)
जिम में एक नए व्यक्ति ने मुझसे पूछा, "आप रोज़ इतनी मेहनत कैसे कर लेते हैं?" मैंने मुस्कुराकर कहा, "पहले दिन सबसे मुश्किल होता है, फिर दूसरा दिन। असल में हर दिन मुश्किल होता है, लेकिन तुम मजबूत होते जाते हो।" यह बात मैंने खुद को भी याद दिलाई।
आज मैंने एक छोटी सी गलती की - स्क्वाट्स के दौरान फॉर्म पर ध्यान न देकर सिर्फ संख्या बढ़ाने की कोशिश की। तीसरे सेट में घुटने में हल्का खिंचाव महसूस हुआ। तुरंत रुक गया और समझ आया कि क्वालिटी हमेशा क्वांटिटी से ज्यादा महत्वपूर्ण है। वजन कम किया और सही फॉर्म के साथ दोबारा शुरू किया।
शाम को योग और मेडिटेशन के 20 मिनट बहुत जरूरी थे। रिकवरी सिर्फ आराम करना नहीं है - यह शरीर को सुनना है। मांसपेशियों में हल्का दर्द अच्छा संकेत है, लेकिन चोट और प्रगति के बीच की रेखा बहुत महीन होती है।
कल सुबह मैं अपने स्ट्रेचिंग रूटीन में पांच मिनट और जोड़ूंगा। लचीलापन भी ताकत जितना ही जरूरी है।
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