आज सुबह पांच बजे अलार्म बजा, लेकिन मैं छह बजे तक बिस्तर में ही रहा। पहले मुझे लगा कि मैं आलसी हो गया हूं, लेकिन फिर याद आया कि कल मैंने पढ़ा था - रिकवरी भी ट्रेनिंग का हिस्सा है। पिछले हफ्ते लगातार छह दिन वर्कआउट किया था, शरीर को आराम चाहिए था।
सुबह की चाय पीते हुए बालकनी में खड़ा था। ठंडी हवा चल रही थी, पड़ोस से किसी के रेडियो से भजन की आवाज आ रही थी। मैंने अपने घुटनों को ध्यान से देखा - दाहिने घुटने में हल्की सी खिंचाव महसूस हुई। यह एक छोटा संकेत था कि मुझे आज लेग डे को स्किप करना चाहिए।
आज का रूटीन:
- सुबह 6:30 - गर्म पानी और निंबू
- 7:00 - हल्की स्ट्रेचिंग (15 मिनट)
- 8:00 - प्रोटीन से भरपूर नाश्ता
- शाम 5:00 - 30 मिनट की वॉक
सबसे बड़ी सीख आज यह मिली: अनुशासन का मतलब सिर्फ कठिन परिश्रम नहीं, बल्कि सही समय पर रुकना भी है। पहले मैं सोचता था कि हर दिन जिम जाना जरूरी है, वरना मैं कमजोर पड़ जाऊंगा। लेकिन एक दोस्त ने कहा था, "भाई, मशीन को भी ठंडा होने का समय चाहिए।" यह बात आज समझ आई।
शाम को वॉक के दौरान पार्क में एक बुजुर्ग व्यक्ति को देखा जो रोज योग करते हैं। वे 70 के हैं लेकिन मुझसे ज्यादा लचीले। मैंने सोचा - फिटनेस एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। छोटे-छोटे, लगातार कदम ही सफलता की चाबी हैं।
कल का प्लान सिंपल है: सुबह 5:30 बजे उठना, अपर बॉडी वर्कआउट करना, और शाम को 10 मिनट का मेडिटेशन। एक छोटा सा बदलाव - कल मैं अपने वर्कआउट की शुरुआत 5 मिनट की डीप ब्रीदिंग से करूंगा।
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