आज दोपहर घर आकर चाय बनाई — ऑफिस का थका देने वाला दिन था, model tuning में घंटे निकल गए। चाय stove...
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आज दोपहर घर आकर चाय बनाई — ऑफिस का थका देने वाला दिन था, model tuning में घंटे निकल गए। चाय stove...
आज सुबह रसोई में दूध उबालने के लिए रखा और चाय बनाने की जल्दी में थोड़ा पीछे हट गया। वापस आया तो...
आज दोपहर ऑफिस से लंच के बाद लौटा तो देखा कि दीवार के साथ-साथ जाने वाली AC की copper pipe पूरी गीली...
आज शाम दफ़्तर से लौटा, कमरे में घुसते ही पंखा चालू किया। सितंबर की उमस अभी गई नहीं थी। पंखा...
आज दोपहर को office का AC बंद था — maintenance का काम। मैं घर से steel की पानी की बोतल लाया था,...
आज शाम रोटी बनाने बैठा था। तवा काफी देर से आँच पर था, और मेरी उँगली भीगी थी — गलती से एक बूँद पानी तवे पर गिरी। जो होना चाहिए था, वह नहीं हुआ। बूँद भाप बनकर उड़ी नहीं, बल्कि तवे से ऊपर उठकर, सरसराते हुए किनारे की तरफ भाग गई — जैसे surface को छू रही हो, पर असल में नहीं।
सवाल यह था: तवा ज़्यादा गर्म हो तो पानी तेज़ी से क्यों नहीं उड़ता — बल्कि और देर क्यों टिकता है?
Observed fact: तवा मध्यम गर्म हो — 100 से 180°C के बीच — तो पानी की बूँद फुफुकारकर, धुआँ उठाकर, कुछ seconds में खत्म हो जाती है। तवा 220-250°C से ऊपर हो, तो वही बूँद ज़्यादा देर टिकती है — उछलती है, घूमती है, धीरे-धीरे सिकुड़ती है।
Widely accepted theory: इसे Leidenfrost effect कहते हैं — Johann Leidenfrost ने 1756 में इसका वर्णन किया था। जब तवा इतना गर्म हो कि बूँद की निचली सतह तुरंत vapourise हो जाए, तो वह भाप बूँद और तवे के बीच एक पतली insulating layer बना देती है — कुछ दसियों से सौ microns मोटी, बालों की चौड़ाई जितनी। इस vapor cushion पर बूँद तैरती है, सीधा contact नहीं रहता, और ऊष्मा धीमे-धीमे मिलती है।
My own inference / numerical sense: भाप की thermal conductivity लगभग 0.025 W/(m·K) होती है। लोहे की conductivity करीब 80 W/(m·K) है — यानी भाप की यह layer धातु से हज़ारों गुना कम ऊष्मा-चालक है। इस "insulating gap" के कारण बूँद का जीवनकाल बढ़ जाता है, भले ही तवा ज़्यादा गर्म हो।
एक बात जो अभी पक्के से नहीं जानता: किसी surface के लिए Leidenfrost temperature exactly कितना होता है? यह material, roughness, और बूँद के size पर depend करता है। कोई sharp threshold नहीं — एक range है।
Meteorology की background से एक connection जो interesting लगा — बादलों में super-cooled water droplets भी thermodynamically unstable state में रह सकती हैं। Mechanism बिल्कुल अलग है, वहाँ nucleation की ज़रूरत होती है, लेकिन यह idea — कि phase transition में delay संभव है — दोनों जगह दिखती है। शायद इसीलिए यह phenomenon पहले से जाना-पहचाना-सा लगा।
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