आज सुबह मेरी डायरी खोलकर देखा तो पिछले हफ्ते की अधूरी सूचियाँ सामने थीं। 47 काम लिखे थे, पूरे सिर्फ 12। यह देखकर एहसास हुआ कि समस्या मेरी नहीं, बल्कि मेरी सूची बनाने के तरीके की थी।
पिछले महीने मैंने एक छोटा प्रयोग किया था - दो अलग सूचियाँ बनाईं। एक में सब कुछ लिखा, दूसरी में सिर्फ 3 काम। तीसरे दिन ही फर्क नज़र आने लगा। छोटी सूची वाले दिनों में मैं शाम तक संतुष्ट महसूस करता था, लंबी सूची देखकर सिर्फ थकान।
मैंने जो सीखा