रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आखिरी कार्डबोर्ड बॉक्स को टेप किया। कमरे में अब सिर्फ एक मैट्रेस बची...
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रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आखिरी कार्डबोर्ड बॉक्स को टेप किया। कमरे में अब सिर्फ एक मैट्रेस बची...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी डिब्बा बंद किया। स्कॉच टेप की चरमराहट रुकी, तो कमरे में बस एक...
रात के नौ बजे थे जब उसने दीवार से आखिरी तस्वीर उतारी। नीचे टेप के चार पीले निशान रह गए — जैसे किसी...
कमरे में एक खाली थर्मस था और दीवार पर टेप के चार निशान। वह रात के ग्यारह बजे सामान बाँध रही थी।...
रात के ग्यारह बज रहे थे जब उसने आख़िरी कार्टन बंद किया। कमरा अजीब लग रहा था — जैसे किसी ने उसकी...
रात के चार बजकर बाईस मिनट पर प्लेटफ़ॉर्म नंबर तीन पर कुल तीन बेंचें थीं। दो पर ताला पड़ा था।
वह तीसरी बेंच के एक कोने में बैठी थी — पैरों के पास एक थैला, थैले के ऊपर एक पुराना टिफ़िन। टिफ़िन के ढक्कन पर किसी ने लाल नेल-पेंट से एक छोटा-सा तारा बनाया था। उसने सोचा — किसने बनाया था? याद नहीं आया। शायद कभी याद था।
चाय वाला अभी नहीं आया था। प्लेटफ़ॉर्म के उस सिरे पर एक कुत्ता लेटा था — सोते हुए भी कान खड़े, जैसे कुछ सुनने की कोशिश में हो।
तभी एक आदमी आया। मध्यम उम्र, कंधे पर झोला, हाथ में एक छाता — बंद, कसकर पकड़ा हुआ। आसमान साफ़ था। तारों से भरा। वह दूसरे कोने में बैठ गया। बेंच छोटी थी, इसलिए दोनों की कोहनियाँ ज़रा-सी पास आ गईं।
कोई बात नहीं हुई। रात के इस वक़्त बात करना अजीब लगता है — जैसे कोई नियम हो, लिखा नहीं, बस मान लिया गया।
कुछ देर बाद उसने टिफ़िन खोला। अंदर एक रोटी थी, थोड़ी-सी सब्ज़ी। ठंडी। उसने धीरे-धीरे खाया। आदमी ने एक बार देखा, फिर नज़र हटा ली। शायद उसे भूख लगी हो। शायद नहीं भी।
स्टेशन पर एक ऐनाउंसमेंट हुई — माइक टूटा था, आधी आवाज़ हवा में बिखर गई। जो शहर का नाम था, वह दोनों पहले से जानते थे।
ट्रेन का हॉर्न दूर से आया, जैसे किसी ने नींद में पुकारा हो।
दोनों उठे। प्लेटफ़ॉर्म पर और लोग थे — कहाँ से आए, पता नहीं। रात में लोग प्रकट होते हैं, जैसे शब्द जो पहले से मौजूद थे पर कभी लिखे नहीं गए।
ट्रेन रुकी। दरवाज़े खुले।
वह एक डिब्बे में चढ़ी, आदमी अगले में। खिड़की से उसने देखा — वह अपनी सीट ढूँढ रहा था, छाता अभी भी बंद, कंधे से लगा।
ट्रेन चली। प्लेटफ़ॉर्म पीछे छूटा। कुत्ता वहीं रहा।
टिफ़िन के ढक्कन पर जो तारा था, वह अब थैले के भीतर था, अँधेरे में।
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