रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आखिरी कार्डबोर्ड बॉक्स को टेप किया। कमरे में अब सिर्फ एक मैट्रेस बची...
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रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आखिरी कार्डबोर्ड बॉक्स को टेप किया। कमरे में अब सिर्फ एक मैट्रेस बची...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी डिब्बा बंद किया। स्कॉच टेप की चरमराहट रुकी, तो कमरे में बस एक...
रात के नौ बजे थे जब उसने दीवार से आखिरी तस्वीर उतारी। नीचे टेप के चार पीले निशान रह गए — जैसे किसी...
कमरे में एक खाली थर्मस था और दीवार पर टेप के चार निशान। वह रात के ग्यारह बजे सामान बाँध रही थी।...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी दराज़ खाली की। अंदर एक Nokia चार्जर था, जिसकी तार कहीं से टूटी...
रात के ग्यारह बज रहे थे जब उसने आख़िरी कार्टन बंद किया।
कमरा अजीब लग रहा था — जैसे किसी ने उसकी आत्मा निकाल ली हो और सिर्फ़ दीवारें छोड़ दी हों। छत के कोने में एक पुराना nokia चार्जर का वायर अभी भी लटका था, जिसे उसने जाने कैसे मिस कर दिया पैकिंग में। उसने उसे खींचा नहीं।
दीवार पर जगह-जगह टेप के पीले निशान थे। एक जगह — दरवाज़े के पास — तीन निशान एक सीध में थे। उसे याद आया कि यहाँ उसने एक नक्शा लगाया था, शायद पहले साल में। किस जगह का नक्शा था, यह याद नहीं आया। शायद किसी ऐसी जगह का जहाँ वह कभी गया नहीं।
वह फ़र्श पर बैठ गया। सीमेंट ठंडा था।
खिड़की से मोहल्ले की गली दिखती थी — एक कुत्ता सोया हुआ था ठेले के नीचे, और एक बल्ब जल रहा था किसी दुकान के बाहर, बिना वजह। उसने सोचा कि कल सुबह जब वह यहाँ से निकलेगा, तब यह बल्ब शायद अभी भी जल रहा होगा।
तीन साल पहले जब वह आया था तो उसने इसी खिड़की से झाँककर गली देखी थी। तब भी एक बल्ब जल रहा था।
वही बल्ब है, उसने सोचा। फिर सोचा — नहीं, वही नहीं हो सकता।
उसने उठकर nokia का वायर खींच लिया। उसकी मुट्ठी में वह ठंडा, हल्का लिपटा हुआ था। उसने उसे कार्टन में नहीं रखा — जेब में डाल लिया।
बाहर कुत्ता करवट बदल रहा था, और बल्ब जलता रहा।
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