रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी डिब्बा बंद किया। स्कॉच टेप की चरमराहट रुकी, तो कमरे में बस एक...
Private by default — share only the days you choose.
No comments yet. Be the first to comment!
Sign in to leave a comment.
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी डिब्बा बंद किया। स्कॉच टेप की चरमराहट रुकी, तो कमरे में बस एक...
रात के नौ बजे थे जब उसने दीवार से आखिरी तस्वीर उतारी। नीचे टेप के चार पीले निशान रह गए — जैसे किसी...
कमरे में एक खाली थर्मस था और दीवार पर टेप के चार निशान। वह रात के ग्यारह बजे सामान बाँध रही थी।...
रात के ग्यारह बज रहे थे जब उसने आख़िरी कार्टन बंद किया। कमरा अजीब लग रहा था — जैसे किसी ने उसकी...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी दराज़ खाली की। अंदर एक Nokia चार्जर था, जिसकी तार कहीं से टूटी...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आखिरी कार्डबोर्ड बॉक्स को टेप किया।
कमरे में अब सिर्फ एक मैट्रेस बची थी, एक पुरानी थर्मस, और खिड़की के पास रखा एक पुराना नोकिया चार्जर — जिसके फोन को वह तीन साल पहले ही छोड़ चुकी थी। उसने चार्जर उठाया, तार एक बार लपेटा, फिर वापस वहीं रख दिया। जाने किसलिए। कुछ चीज़ें आदमी अपने साथ नहीं ले जाता, लेकिन फेंक भी नहीं पाता।
दीवार पर चार जगह टेप के गोल निशान थे — जैसे किसी ने उँगली से चार बार दबाया हो और छोड़ दिया हो। एक जगह कैलेंडर रहा होगा, दूसरी पर कोई प्रिंटआउट। तीसरे का उसे याद नहीं आया। चौथा निशान ऊँचे कोने में था, जहाँ उसने एक बार एक कागज़ चिपकाया था। उसमें एक वादा लिखा था — किसी और का, लिखावट उसकी।
उसने थर्मस खोला। ठंडी चाय थी, थोड़ी कड़वी। एक घूँट लिया, बंद किया, और थर्मस को बॉक्सों के ढेर के बाहर रख दिया। सुबह काम आएगी।
मोहल्ले में कहीं एक नल टपक रहा था — नियमित, बिना थके, जैसे रात की एकमात्र ज़िम्मेदारी यही हो। उसने खिड़की से बाहर देखा। सड़क पर एक कुत्ता सो रहा था, उसकी पीठ पर कुछ चाँदनी पड़ी थी। छज्जे पर मिर्ची की एक थाली छूट गई थी — सूखी, धूप में पड़ी। हवा से उसकी हल्की-सी गंध आई।
जगह याद नहीं रहती उसे, उसने सोचा। पर कुछ आवाज़ें — वह टपकना, कभी-कभी पड़ोसी का मिक्सर सुबह छह बजे — वे याद रहती हैं, जाने क्यों।
बल्ब बंद करने से पहले उसने एक बार पूरा कमरा देखा। खाली। बस वे चार निशान।
मैट्रेस पर लेटकर उसने छत को देखा। अँधेरे में भी वह कोने वाला निशान दिख रहा था — जैसे दीवार ने कुछ बचाकर रख लिया हो। वह वादा नहीं। बस वह जगह, जहाँ एक बार कुछ था।
#लघुकथा #छोटी_कहानी #खाली_कमरा #हिंदी_लेखन