बस स्टैंड पर सुबह के पाँच बजकर सात मिनट पर कुल चार लोग थे। एक बूढ़ा आदमी जो ज़मीन पर बोरा बिछाकर...
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बस स्टैंड पर सुबह के पाँच बजकर सात मिनट पर कुल चार लोग थे। एक बूढ़ा आदमी जो ज़मीन पर बोरा बिछाकर...
त्योहार के अगले दिन सुबह सात बजे मोहल्ले में झाड़ू की आवाज़ पहले उठती है, किसी और चीज़ से...
रात के चार बजकर बाईस मिनट पर प्लेटफ़ॉर्म नंबर तीन पर कुल तीन बेंचें थीं। दो पर ताला पड़ा था। वह...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आखिरी कार्डबोर्ड बॉक्स को टेप किया। कमरे में अब सिर्फ एक मैट्रेस बची...
रात के ग्यारह बजे थे जब उसने आख़िरी डिब्बा बंद किया। स्कॉच टेप की चरमराहट रुकी, तो कमरे में बस एक...
शाम के छः बजकर तेरह मिनट पर बारिश रुकी।
छत पर रस्सी पर टँगे कपड़े भीग चुके थे — सुबह दस बजे धूप थी, इसलिए उसने छोड़ दिए थे। बादल दोपहर में उठे, लेकिन लगा शायद निकल जाएँगे। नहीं निकले। बारिश के बाद छत की ज़मीन पर पानी की एक पतली लकीर थी जो कोने की नाली की तरफ़ धीरे-धीरे जा रही थी।
वह एक-एक कपड़ा उठाने लगी।
नीली सलवार। दो तौलिए। एक पुरानी कमीज़ जो रस्सी पर कब से थी, ठीक से याद नहीं। बीमारी में धोई थी — शायद पिछले मार्च में, या उससे पहले वाले मार्च में। धोई, सुखाई, फिर भूल गई।
कमीज़ की दाहिनी जेब में कुछ था।
एक मुड़ा हुआ कागज़। बस का टिकट। बारिश से नरम हो गया था, स्याही धुंधली — सिर्फ एक चीज़ बची थी पढ़ने के लिए: "47"।
वह रुकी।
47 — वही बस जो सुबह पड़ाव पर छूट जाती थी, जिसे दौड़कर पकड़ना पड़ता था। कंडक्टर झुंझलाकर देखता था, फिर टिकट देता था बिना कुछ कहे। एक बार उस बस में एक आदमी बैठा था खिड़की के पास। आँखें बंद थीं, लेकिन उँगलियाँ — उँगलियाँ सीट की लोहे की रेलिंग पर धीरे-धीरे थपथपा रही थीं। किसी धुन पर। कौन-सी धुन? उसने उस वक्त सोचा था कि वह पहचान लेगी। नहीं पहचाना।
बस में भीड़ थी। वह आदमी अगले पड़ाव पर उतर गया था — उसने चेहरा भी नहीं देखा था। फिर भी वह पल — खिड़की से आती हवा, उँगलियों की आवाज़, और धूप जो सीट के बाएँ हिस्से पर पड़ रही थी — किसी तरह अकेला रह गया था।
उसने टिकट वापस जेब में रखा। कमीज़ को भीगी ही बाल्टी में डाल दिया।
बाकी कपड़े उठाए। रस्सी पर अब सिर्फ एक पुराना दुपट्टा बचा था — किसका था, यह भी ठीक से याद नहीं। शायद माँ का, शायद उसका अपना पुराना। उसने उसे छोड़ दिया। कल देखेंगे।
नीचे से आवाज़ आई — रोटी ठंडी हो रही है।
उसने छत का दरवाज़ा बंद किया। कुंडी लगाई। आसमान में बादल फिर से भर रहे थे — लेकिन यह उसने नहीं देखा। वह नीचे जा चुकी थी।
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