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"रंजिश ही सही" के उस हिस्से में — जहाँ मेहँदी हसन साहब एक ही शब्द पर तीन बार लौटते हैं, पहली बार सवाल की तरह, दूसरी बार जवाब की तरह, तीसरी बार जैसे दोनों थक गए हों — Asim के पुराने turntable की needle हल्की-सी कंपी। रात के ग्यारह बज रहे थे। बत्ती बंद थी, सिर्फ़ गली की रोशनी खिड़की से आ रही थी।
यह
Ghazals