Storyie
ExploreBlogPricing
Storyie
XiOS AppAndroid Beta
Terms of ServicePrivacy PolicySupportPricing
© 2026 Storyie
Meera
@meera
March 19, 2026•
0

आज सुबह बाज़ार से लौटते समय एक पुरानी इमारत की दीवार पर मुग़ल काल की एक फीकी पड़ती हुई नक्काशी दिखी। पत्थर पर उकेरे गए फूलों के बीच फ़ारसी लिपि में कुछ लिखा था, जो समय और मौसम ने लगभग मिटा दिया है। मैंने रुककर उसे छुआ—पत्थर खुरदुरा था, और धूप में गर्म। मुझे याद आया कि इतिहास केवल किताबों में नहीं, हमारे आसपास की इन ख़ामोश दीवारों में भी जीवित रहता है।

इस दृश्य ने मुझे बेगम समरू की कहानी की याद दिला दी। फ़रज़ाना नाम की एक नर्तकी, जो अठारहवीं सदी में सरधना की शासिका बन गई। वह न केवल एक कुशल प्रशासक थीं, बल्कि एक सैन्य रणनीतिकार भी। मुझे हमेशा यह सोचकर आश्चर्य होता है कि उस समय, जब महिलाओं को घर की चारदीवारी में रहने को कहा जाता था, वह किस तरह अपनी सेना का नेतृत्व करती थीं। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि इतिहास में महिलाओं की भूमिका अक्सर हाशिये पर डाल दी जाती है, जबकि वे केंद्र में थीं।

बाज़ार में एक बुजुर्ग दुकानदार ने मुझसे पूछा, "बेटी, इतिहास पढ़कर क्या मिलता है? आज का ज़माना तो बिलकुल अलग है।" मैंने मुस्कुराकर कहा कि इतिहास हमें बताता है कि हम कहाँ से आए हैं, और वह हमें आज की समस्याओं को समझने का एक नया नज़रिया देता है। वह मान गए, लेकिन मुझे लगा कि मैं अपनी बात पूरी तरह समझा नहीं पाई।

शाम को अपनी नोटबुक में एक पुरानी पंक्ति लिखी: "जो अपने इतिहास को भूल जाता है, वह उसे दोहराने के लिए अभिशप्त है।" यह सच है, लेकिन इतिहास सिर्फ़ चेतावनी नहीं है—यह प्रेरणा और आत्मविश्वास का स्रोत भी है। बेगम समरू जैसी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि बदलाव हमेशा संभव है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।

#इतिहास #मानविकी #प्रेरणा #संस्कृति #चिंतन

Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Sign in to leave a comment.

More from this author

March 17, 2026

आज सुबह की धूप खिड़की के शीशे पर एक अजीब कोण से पड़ रही थी—बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी पुराने मंदिर...

March 16, 2026

आज सुबह चाय बनाते समय खिड़की से आती हल्की धूप में धूल के कण तैरते देखे। एकदम शांत, धीमी गति से।...

March 15, 2026

आज सुबह बाज़ार से लौटते समय एक पुरानी दुकान के बाहर तांबे की घंटियाँ हवा में झनझना रही थीं। वह...

March 14, 2026

आज सुबह चाय बनाते समय खिड़की से बाहर देखा तो एक पुरानी इमारत की दीवार पर धूप की किरणें तिरछी पड़...

March 12, 2026

आज सुबह चाय की चुस्की लेते हुए खिड़की से बाहर देखा तो एक बूढ़ा माली बगीचे में पौधों को पानी दे रहा...

View all posts