आज सुबह मुझे 1863 के एक ज़िला बंदोबस्त रिकॉर्ड की जिल्द सौंपी गई — कवर उखड़ रहा था, पहली दो...
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आज सुबह मुझे 1863 के एक ज़िला बंदोबस्त रिकॉर्ड की जिल्द सौंपी गई — कवर उखड़ रहा था, पहली दो...
आज दोपहर को एक पुरानी बही के भीतर से एक मुड़ा हुआ कागज़ निकला — शायद किसी ने उसे बाद में रखा था, या...
आज सुबह संरक्षण कक्ष में एक बही खोली जो 19वीं सदी की है — शायद 1838 से 1845 के बीच की, हालाँकि...
आज दोपहर को एक पुरानी बही उठाई — 1847 की, जयपुर रियासत के राजस्व विभाग की। कागज़ पीला और कुछ जगहों...
आज सुबह जब मैंने सन् 1847 की एक बही खोली — जयपुर रियासत के राजस्व विभाग की, परगना सांगानेर की — तो...
आज सुबह एक पुरानी बही का बंडल खुला — 1847 के लगभग का, जयपुर रियासत के राजस्व विभाग का। कागज़ भूरा पड़ चुका है, कोनों पर चटका हुआ। पहले पन्ने पर कोई मुहर नहीं — बस एक कातिब की लिखावट, साफ़ और सुलेखी — और उसके ऊपर, दाहिने हाशिये पर, दूसरे हाथ से लिखे छोटे-छोटे अंक। वे अंक बही के मुख्य हिसाब से मेल नहीं खाते। यह "जो अज्ञात है" की श्रेणी में है — किसने जोड़े, किस मतलब से, यह मैं नहीं जानती। शायद कोई जाँच करने वाला था; शायद कोई ग़लती सुधार रहा था। अनुमान है।
मुख्य बही में एक गाँव का नाम बार-बार आता है — "मोरीपुरा।" 19वीं सदी के उपलब्ध नक्शों में और आज के राजस्व रिकॉर्ड में — दोनों जगह — यह नाम नहीं मिला। हो सकता है वह किसी बड़ी राजस्व इकाई में समा गया हो, या नाम बदल गया हो। अनुमान है, तथ्य नहीं।
उसी बही में एक पंक्ति आई:
"घी — ३ आने सेर, बाज़ार भाव।"
1847 का दाम। उस साल की फ़सल कैसी रही, इसका ज़िक्र इस बही में नहीं है — जो अज्ञात है। पर तीन आने में एक सेर घी — एक साधारण घर में हफ्ते भर की चीज़ रही होगी, शायद। यह मेरा अनुमान है, कोई प्रमाण नहीं।
एक नाम था — "रामदेई, मुंशी की स्त्री।" बस इतना। वह इस बही में क्यों दर्ज है, स्पष्ट नहीं। जो ज्ञात है: उसका नाम है। जो अज्ञात है: वह इस मामले में किस पक्ष में थी — या थी भी। मुझे पसंद नहीं कि मैं उसके बारे में कहानी गढ़ूँ जो रिकॉर्ड में है ही नहीं।
शाम को चौड़ा रास्ता से लौटते हुए एक पल के लिए रुकी। बाज़ार में घी की दुकान थी — लोग तुलवाते हुए, दाम पूछते हुए। उस बही का तीन-आने वाला दाम और आज का दाम — बीच में बहुत बड़ा फ़ासला है। पर तुलवाने का वह काम, दाम पूछने का वह ढंग — शायद उतना नहीं बदला। इसे मैं "निरंतरता" नहीं कहूँगी। यह बस एक छोटी-सी समानता थी जो आज दिखी।
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