आज सुबह किचन में घुसते ही मुझे पुरानी यादें ताज़ा हो गईं। खिड़की से आती धूप ने काउंटर पर रखे टमाटरों को चमका दिया था, और उनकी महक ने मुझे बचपन में दादी के घर की याद दिला दी। उन्होंने एक बार कहा था, "असली स्वाद तभी आता है जब तुम अपने हाथों से बनाओ और दिल से परोसो।" आज मैंने उनकी बात को फिर से महसूस किया।
मैंने सोचा था कि आज कुछ सिंपल बनाऊंगी—दाल और चावल। लेकिन जैसे ही मैंने मसाले भूनने शुरू किए, रसोई में एक अलग ही खुशबू फैल गई। जीरे की तड़क, हल्दी का रंग, और टमाटर का खट्टापन—सब कुछ मिलकर एक जादू सा कर रहे थे। मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ खाना नहीं था, बल्कि एक अनुभव था जो मैं अपने परिवार के साथ बांट रही थी।
पहले मैंने दाल को गलत तरीके से पकाया। मैंने सोचा था कि ज्यादा पानी डालने से वह जल्दी गल जाएगी, लेकिन वह बहुत पतली हो गई। फिर मैंने थोड़ा बेसन मिलाया और धीमी आंच पर पकाया। धीरे-धीरे दाल का रंग गहरा हो गया और उसकी गाढ़ापन वापस आ गई। इस छोटी सी गलती ने मुझे सिखाया कि धैर्य और सही तरीका कितना जरूरी है।
खाने की मेज पर बैठे हुए मेरे भाई ने कहा, "आज की दाल बहुत अच्छी बनी है। तुमने क्या खास डाला?" मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "बस थोड़ा सा प्यार और एक छोटी सी गलती से सीखी हुई बात।" उसने हंसते हुए कहा, "तो अगली बार भी गलती कर लेना!"
मैंने आज एक छोटा सा प्रयोग भी किया। मैंने दो तरह के चावल बनाए—एक में नींबू का रस मिलाया और दूसरे में सिर्फ नमक। नींबू वाले चावल का स्वाद ताज़ा और हल्का था, जबकि सादे चावल की सादगी में भी एक अलग ही मिठास थी। यह छोटा सा प्रयोग मुझे यह समझने में मदद कर गया कि कभी-कभी सबसे सरल चीजें ही सबसे खास होती हैं।
खाने के बाद मैंने एक पुरानी कुकबुक खोली जो मेरी दादी ने मुझे दी थी। उसमें एक लाइन लिखी थी: "खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि दिल को भी खुश करने के लिए बनाया जाता है।" आज मुझे इस बात का सच्चा मतलब समझ आया। जब तुम किसी के लिए प्यार से खाना बनाते हो, तो वह सिर्फ एक व्यंजन नहीं रह जाता—वह एक यादगार पल बन जाता है।
आज की यह सीख मेरे साथ हमेशा रहेगी: खाना बनाना एक कला है, और हर गलती एक नया सबक सिखाती है। अगली बार जब मैं किचन में जाऊंगी, तो मैं और भी ज्यादा सावधानी से और प्यार से बनाऊंगी।
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