रात के करीब ग्यारह बजे थे। Laptop बंद करके उठा, तो देखा कि फ्रिज से निकाला हुआ पानी का गिलास मेज पर गीला हो रहा था — नीचे एक छोटा गोल घेरा बन गया था। गिलास बाहर से गीला क्यों? अंदर से कोई रिसाव नहीं था।
जवाब साफ है: यह पानी बाहर की हवा से आया। हवा में हमेशा कुछ water vapour (जलवाष्प) घुली रहती है। हर तापमान पर हवा एक तय मात्रा में ही vapour रख सकती है — इस सीमा को saturation कहते हैं। जब हवा किसी ठंडी सतह के सम्पर्क में आती है, उसकी vapour रखने की क्षमता घट जाती है और vapour, liquid में बदल जाती है। इसे condensation (संघनन) कहते हैं।
थोड़ा अनुमान: मई में Hyderabad में humidity करीब 50% और तापमान 30°C मान लो। इस condition में dew point — वो तापमान जहाँ हवा saturate हो जाती है — लगभग 18–19°C के order में होगा। फ्रिज का पानी 5–8°C का होता है। तो गिलास की सतह dew point से करीब 10–13 डिग्री नीचे है। Condensation तय है।
एक ग़लतफ़हमी जो मेरे मन में भी कभी थी: "ठंड पानी को खींचती है।" यह सही नहीं है। ठंड कुछ नहीं "खींचती"। बस ठंडी सतह के पास हवा के molecules की kinetic energy कम हो जाती है और वो liquid बनाने लायक नज़दीक आ जाते हैं। यह कोई pull नहीं, एक statistical redistribution है।
एक सवाल जिसका जवाब मेरे पास अभी नहीं है: पहली बूँद ठीक-ठीक कहाँ बनती है? Nucleation की प्रक्रिया — सतह की किसी micro-roughness पर या किसी dust particle पर — सामान्य thermodynamics की किताबों में आती है, लेकिन उसका detail मुझे ठीक से नहीं पता। "नहीं पता" एक जायज़ जवाब है।
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