आज का इरादा था कि कश्मीरी गेट से लाल क़िला तक पैदल जाऊँगा — मेट्रो वाली लाइन के नीचे-नीचे, सड़क...
आज का इरादा था कि कश्मीरी गेट से लाल क़िला तक पैदल जाऊँगा — मेट्रो वाली लाइन के नीचे-नीचे, सड़क...
आज सोचा था कि Jama Masjid के गेट नंबर एक से निकलूँगा और Chawri Bazar मेट्रो तक पैदल जाऊँगा। सात-आठ...
आज का इरादा था — Lal Qila मेट्रो से Delhi Gate तक पैदल, सीधी सड़क, बहुत दूर नहीं। पर गेट से निकलते...
आज का इरादा था — चाँदनी चौक मेट्रो से निकलकर पुराने बाज़ार की तरफ़ पैदल, फिर नली-वाली गली होते हुए...
आज का plan था Chandni Chowk मेट्रो से निकलकर Kashmere Gate तक पैदल जाना। दूरी ज़्यादा नहीं — तीन...
आज का इरादा था — लाल किला मेट्रो से चाँदनी चौक तक पैदल, बीच में जो भी आए। दूरी ज़्यादा नहीं, शायद तीन किलोमीटर। पर पुरानी दिल्ली में तीन किलोमीटर का मतलब डेढ़ घंटा होता है, कम नहीं।
निकला तो गेट नंबर तीन से, जो बिल्कुल गलत दिशा में खुलता है। मुझे पूर्व जाना था, मैं पश्चिम की तरफ़ चल पड़ा। पाँच मिनट बाद एक दीवार आई — सचमुच एक दीवार, कोई गली नहीं — और मैंने समझा कि गूगल मैप उल्टा था या मैं उल्टा था। दोनों में से एक ज़रूर।
चलते-चलते एक नालीनुमा गली मिली जिसके ऊपर किसी ने टीन की छत डाल दी थी। अंदर एक छोटी सी दुकान थी जिसके बाहर लकड़ी के तख्ते पर हाथ से लिखा था — "सरकारी सेवाएँ उपलब्ध नहीं"। दुकान बंद थी, पर यह बोर्ड किसने लगाया और किस सरकारी सेवा की बात है, यह मुझे आज भी नहीं पता। शायद पहले यहाँ कुछ होता था।
थोड़ी देर बाद एक ठेले पर रुका। चाय वाले ने कुल्हड़ में चाय दी — कड़वी, ज़्यादा अदरक वाली, और इतनी गरम कि पहला घूँट होंठ ने मना कर दिया। कुल्हड़ की मिट्टी की गंध चाय से ज़्यादा थी, और यह बुरा नहीं लगा। वहाँ एक बुज़ुर्ग बैठे थे जो अपनी चाय खत्म कर चुके थे पर कुल्हड़ अभी भी पकड़े हुए थे। मैंने एक-दो मिनट वहीं खड़े रहकर पिया।
चाँदनी चौक तक पहुँचते-पहुँचते भीड़ बदल गई। लाल किला की तरफ़ सैलानी ज़्यादा थे, यहाँ दुकानदार और ठेलेवाले। सड़क वही, चाल अलग। एक जगह एक ऑटो इस तरह पार्क था कि आधा फ़ुटपाथ पर था और आधा नाली के किनारे — बिल्कुल तुला हुआ, जैसे किसी ने तराज़ू बनाने की कोशिश की हो।
आज की डायरी बस इतनी। पैर खुश नहीं हैं, पर नोटबुक में तीन पन्ने भर गए।
#पुरानी_दिल्ली #पैदल_डायरी #चाय_की_थड़ी #मेट्रो_से_आगे