आज का लक्ष्य था आज़ादपुर मेट्रो से मॉडल टाउन तक पैदल चलना। दोनों एक ही पीली लाइन पर हैं, एक स्टेशन...
Private by default — share only the days you choose.
Sign in to leave a comment.
आज का लक्ष्य था आज़ादपुर मेट्रो से मॉडल टाउन तक पैदल चलना। दोनों एक ही पीली लाइन पर हैं, एक स्टेशन...
आज का इरादा था कि चाँदनी चौक मेट्रो से चलते हुए लाल किले की तरफ़ वाली सड़क तक पहुँचूँगा — सीधी...
आज का इरादा था कि कश्मीरी गेट से लाल क़िला तक पैदल जाऊँगा — मेट्रो वाली लाइन के नीचे-नीचे, सड़क...
आज सोचा था कि Jama Masjid के गेट नंबर एक से निकलूँगा और Chawri Bazar मेट्रो तक पैदल जाऊँगा। सात-आठ...
आज का इरादा था — Lal Qila मेट्रो से Delhi Gate तक पैदल, सीधी सड़क, बहुत दूर नहीं। पर गेट से निकलते...
आज रविवार था। इरादा था कश्मीरी गेट मेट्रो से निकलकर यमुना की तरफ़ वाले रास्ते पर चलना — नदी देखनी थी, बस दूर से, कोई बड़ा प्लान नहीं था। B गेट से निकला, पर जैसे ही बाहर आया, किसी ने बिना बताए मुझे A गेट की दिशा में घुमा दिया। यह "किसी ने" असल में मैं ख़ुद था। पाँच मिनट चलने के बाद एक चाय-थड़ी के पास रुककर फ़ोन निकाला, देखा — ग़लत दिशा थी।
मुड़ा और सही रास्ते पर आया। एक पुरानी गली में घुसा जहाँ एक तीन-मंज़िला नीली इमारत थी। ज़मीनी मंज़िल पर एक बंद दुकान। बाहर का साइनबोर्ड पढ़ा: "मेहता ब्रदर्स, इलेक्ट्रिकल गुड्स, स्थापना १९६२।" पेंट चटका था, 'ब्रदर्स' का 'ब' आधा उखड़ चुका था। दुकान के बाहर एक पुराना स्कूटर खड़ा था — सीट पर जंग और धूप की परतें बराबर-बराबर। दुकान कब से बंद है यह नहीं पता, पर स्कूटर देखकर लगता है कोई रोज़ आता ज़रूर है।
थोड़ा आगे एक ढकी हुई गली थी जो शायद किसी पुराने नाले के ऊपर बनी थी। नीचे से पानी की हल्की बू आती थी — पुरानी ईंट और नमी मिली हुई। सड़क के बीच में एक हल्की उठान थी। एक तरफ़ से ऑटो निकलता था, दूसरी तरफ़ से ठेला, और दोनों एक-दूसरे को देखकर भी नहीं देखते थे — यह दिल्ली की सड़कों की अपनी भाषा है।
दोपहर में भूख लगी। एक छोटी थड़ी पर समोसे थे, छोटे और तिरछे। एक लिया — ऊपर से करारा, अंदर आलू गर्म और नमकीन थोड़ा ज़्यादा। चाय माँगी। दुकानदार ने बिना रुके कहा, "दूध ख़तम।" तो समोसा अकेले खाया, जो उतना ही ठीक था।
वापसी पर एहसास हुआ कि यमुना देखने का जो इरादा था वो पूरा नहीं हुआ — नदी दिखी नहीं, बस उसकी तरफ़ चलता रहा। फ़ोन ने बताया — ६.२ किलोमीटर। इतने में तो पहुँच जाना था। शायद गलियाँ सीधी नहीं थीं। शायद मैं भी नहीं हूँ।
#शहर_की_सैर #पैदल_डायरी #पुरानी_दिल्ली #चाय_की_थड़ी