आज का इरादा था — Lal Qila मेट्रो से Delhi Gate तक पैदल, सीधी सड़क, बहुत दूर नहीं। पर गेट से निकलते...
आज का इरादा था — Lal Qila मेट्रो से Delhi Gate तक पैदल, सीधी सड़क, बहुत दूर नहीं। पर गेट से निकलते...
आज का इरादा था — चाँदनी चौक मेट्रो से निकलकर पुराने बाज़ार की तरफ़ पैदल, फिर नली-वाली गली होते हुए...
आज का plan था Chandni Chowk मेट्रो से निकलकर Kashmere Gate तक पैदल जाना। दूरी ज़्यादा नहीं — तीन...
आज का इरादा था — लाल किला मेट्रो से चाँदनी चौक तक पैदल, बीच में जो भी आए। दूरी ज़्यादा नहीं, शायद...
आज सोचा था कि जामा मस्जिद से चाँदनी चौक तक पैदल निकलूँगा — बस दो स्टेशनों के बीच का फ़ासला, कितना...
आज सोचा था कि Jama Masjid के गेट नंबर एक से निकलूँगा और Chawri Bazar मेट्रो तक पैदल जाऊँगा। सात-आठ किलोमीटर, दोपहर ढलने से पहले। मगर उतरा तो गलत गेट से निकल गया — नंबर तीन की तरफ, जो बिल्कुल उल्टी दिशा में है। मैप खोला तो स्क्रीन पलटी हुई थी। पाँच मिनट तक उत्तर को दक्षिण समझता रहा।
गली में घुसा तो एक पुरानी दुकान का बोर्ड दिखा — "मेसर्स रमेश ब्रदर्स, हार्डवेयर एण्ड पेंट्स, स्थापित 1961" — अक्षर इतने धुँधले थे कि "स्थापित" पढ़ने के लिए दो बार रुकना पड़ा। शटर पर ताला था। लेकिन ऊपर की मंज़िल की खिड़की खुली थी और तार पर कपड़े सूख रहे थे। इमारत ज़िंदा थी, दुकान नहीं — इस बात में कुछ था जो मैं समझा नहीं पाऊँगा।
थोड़ी देर बाद एक थड़ी मिली जहाँ दुकानदार कुल्हड़ में चाय दे रहा था। मैंने एक माँगी। कुल्हड़ उठाया तो उसमें से मिट्टी की वो हल्की गंध आई जो अब कम मिलती है। चाय थोड़ी कड़वी थी, इलायची ज़्यादा — मुझे पसंद आई। पास में एक बुज़ुर्ग बैठे थे जो बस सड़क देख रहे थे। मैंने नमस्ते किया। उन्होंने देखा, सिर हिलाया, वापस सड़क देखने लगे। शायद अजनबियों की नमस्ते उनके लिए नई नहीं रही।
Chawri Bazar के नज़दीक एक ढलान है जो आँखों को दिखती नहीं पर पैरों को पता चल जाती है। यहाँ की गलियाँ थोड़ी चौड़ी हैं, ऑटो और ठेले साथ-साथ चलते हैं और कोई ज़्यादा हॉर्न नहीं बजाता — शायद बजाने की जगह नहीं है।
मेट्रो स्टेशन पहुँचा। पैर बोल रहे थे कि बस करो। नोटबुक में एक लाइन लिखी: "रमेश ब्रदर्स का ताला और ऊपर सूखते कपड़े।" ट्रेन में बैठा तो लगा — आज के लिए यही काफी है।
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