आज रविवार था। इरादा था कश्मीरी गेट मेट्रो से निकलकर यमुना की तरफ़ वाले रास्ते पर चलना — नदी देखनी...
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आज रविवार था। इरादा था कश्मीरी गेट मेट्रो से निकलकर यमुना की तरफ़ वाले रास्ते पर चलना — नदी देखनी...
आज का लक्ष्य था आज़ादपुर मेट्रो से मॉडल टाउन तक पैदल चलना। दोनों एक ही पीली लाइन पर हैं, एक स्टेशन...
आज का इरादा था कि चाँदनी चौक मेट्रो से चलते हुए लाल किले की तरफ़ वाली सड़क तक पहुँचूँगा — सीधी...
आज का इरादा था कि कश्मीरी गेट से लाल क़िला तक पैदल जाऊँगा — मेट्रो वाली लाइन के नीचे-नीचे, सड़क...
आज सोचा था कि Jama Masjid के गेट नंबर एक से निकलूँगा और Chawri Bazar मेट्रो तक पैदल जाऊँगा। सात-आठ...
आज सोमवार था, और सोमवार को चलना ज़्यादा ज़रूरी लगता है — बाकी दुनिया दफ़्तर की तरफ़ भागती है, मैं उल्टी दिशा में खड़ा होता हूँ। इंदरलोक मेट्रो से निकला। सुबह के नौ बजे थे, दिल्ली अभी पूरी तरह जागी नहीं थी। इरादा था शास्त्री नगर तक पैदल जाना — एक ही स्टेशन का फ़ासला, पर ज़मीन पर कोई तीन किलोमीटर। नोटबुक बैग में, पेंसिल ऊपर वाली जेब में।
गेट नंबर दो से निकला और तुरंत समझ आया कि मुझे नंबर एक से निकलना था। पाँच मिनट उल्टा चला, फिर मुड़ा। यह अब इतनी बार हो चुका है कि मैं इसे "वार्मअप" मानने लगा हूँ। अगले जनम में शायद सही गेट से निकलूँगा।
दाहिनी तरफ़ एक पुरानी दीवार पर साइनबोर्ड था — "राधे साइकिल हाउस, स्थापना 1963।" दुकान वहाँ नहीं थी, सिर्फ़ बोर्ड था। शायद साइकिलें ख़ुद ही कहीं चली गईं और बोर्ड रह गया। नीचे पान की लाल धारियाँ थीं — जैसे किसी ने इसे धीरे-धीरे एक नई पेंटिंग में बदलने का मन बना लिया हो और फिर बीच में छोड़ दिया।
एक छोटे से चौराहे पर एक बुज़ुर्ग छोले-कुलचे बेच रहे थे — एक कुर्सी, एक तवा, एक छोटा तराज़ू। मैंने एक प्लेट माँगी। उन्होंने बिना कुछ पूछे दे दी, जैसे पहले से पता था। छोलों में एक तीखापन था जो सीधे माथे तक जाता है और कोई पाँच मिनट रहता है। कुलचा ज़रा सख़्त था, पर उसमें वो ज़िद थी जो नरम चीज़ों में नहीं होती।
शास्त्री नगर आया तो बाज़ार का मिज़ाज बदल गया था। इंदरलोक वाली तरफ़ कपड़े और पर्दे थे; यहाँ स्टेशनरी और प्लास्टिक के डिब्बे। एक ही मेट्रो लाइन, एक स्टेशन का फ़ासला — पर लगा जैसे दो अलग-अलग शहर हैं जो बस एक पुल साझा करते हैं और बाकी वक्त एक-दूसरे की तरफ़ पीठ किए खड़े रहते हैं।
वापसी मेट्रो में नोटबुक खोली। एक ही लाइन लिखी: "शहर बदलता नहीं, बस हर किलोमीटर पर नई शर्त रखता है।"
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