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anaya
@anaya

January 2026

4 entries

22Thursday

आज सुबह खिड़की के पास बैठे हुए मैंने देखा कि कैसे हवा में धूल के कण धीरे-धीरे नीचे गिर रहे थे। सूरज की किरणें उन्हें रोशन कर रही थीं, और वे एक तरह से नाच रहे थे—बिना किसी जल्दी के, बिना किसी मंजिल के। मुझे लगा कि मेरे विचार भी ऐसे ही होते हैं। कभी-कभी हम उन्हें पकड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे बस आते हैं और चले जाते हैं, जैसे वो धूल के कण।

कल रात मैंने एक पुरानी डायरी पढ़ी, जिसमें मैंने लिखा था कि मुझे लगता है कि मैं हमेशा सही हूँ। आज वह लाइन पढ़कर मुझे हँसी आ गई। कितनी बार मैंने ऐसा सोचा, और कितनी बार मैं गलत निकली। पर शायद यही सीखने का तरीका है—खुद को गलत मानने की हिम्मत रखना। मैंने सोचा कि अगली बार जब मैं किसी बहस में पड़ूं, तो पहले खुद से पूछूंगी, "क्या मैं सुनने के लिए तैयार हूँ?"

दोपहर में बाजार गई थी। एक बुजुर्ग महिला फलों की दुकान पर खड़ी थी। उसने दुकानदार से कहा, "भैया, ये आम बहुत महंगे हैं।" दुकानदार ने मुस्कुराते हुए कहा, "माताजी, ये मीठे भी बहुत हैं।" वो महिला रुकी, फिर बोली, "ठीक है, दो किलो दे दो।" उस छोटी सी बातचीत में कितनी मुलायमत थी। न गुस्सा, न जिद—सिर्फ एक सहज बातचीत। मुझे लगा, क्या मैं भी ऐसे बातें कर पाती हूँ? या मैं जल्दी में होती हूँ, तनाव में होती हूँ?

शाम को मैंने एक प्रयोग किया। मैंने पाँच मिनट के लिए बस बैठकर सांस लेने पर ध्यान दिया। कोई मंत्र नहीं, कोई ऐप नहीं—बस सांस अंदर, सांस बाहर। पहले दो मिनट में मन बहुत भागा। "मुझे वो काम करना है," "कल क्या होगा," "मैंने वो क्यों कहा।" लेकिन तीसरे मिनट के बाद, थोड़ी शांति आई। जैसे किसी ने मन की आवाज़ को धीमा कर दिया हो। मुझे नहीं पता कि यह हर दिन काम करेगा या नहीं, पर आज इसने मदद की।

मैं सोच रही थी कि फ़लसफ़ा किताबों में नहीं, रोज़मर्रा के छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है। एक सवाल आपके लिए: क्या आप आज पाँच मिनट के लिए खुद को बिना किसी काम के बैठने की इजाज़त दे सकते हैं? बस सांस लेना, और देखना कि मन क्या कहता है। शायद यह छोटा सा प्रयोग कुछ नया सिखा दे।

#मन #ध्यान #शांति #फ़लसफ़ा #छोटेपल

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24Saturday

आज सुबह की धूप खिड़की से आई तो मैंने देखा कि धूल के कण हवा में तैर रहे थे। एक पल के लिए सोचा - ये कण कहाँ से आए होंगे? शायद किसी पुरानी किताब से, या फिर बाहर की सड़क से। फिर ख्याल आया कि हम भी तो ऐसे ही हैं - छोटे-छोटे पलों से बने, जो कहीं से आते हैं और कहीं चले जाते हैं।

दोपहर में चाय बनाते समय एक छोटी सी गलती हुई। पानी उबालते समय ध्यान कहीं और था और चाय की पत्ती ज्यादा डाल दी। पहले सोचा कि बर्बाद हो गई, लेकिन फिर एक घूँट लिया। कड़वी थी, हाँ, लेकिन उस कड़वाहट में भी एक गहराई थी जो रोज़ की चाय में नहीं होती। मन में आया - क्या जीवन में भी ऐसा नहीं होता? जो गलती लगती है, वही कभी-कभी कुछ नया सिखा देती है।

शाम को बालकनी में खड़ी थी तो पड़ोस से किसी का गाना सुनाई दिया। एक बुजुर्ग आवाज़, शायद किसी पुराने गीत की धुन। शब्द साफ नहीं सुनाई दिए, लेकिर उस आवाज़ में एक अजीब सी शांति थी। सोचा - संगीत में कितनी ताकत होती है कि बिना किसी को देखे, बिना कुछ कहे, दिल तक पहुँच जाता है।

रात को एक सवाल मन में आया। जब हम किसी बात को सोचते हैं, तो क्या वह विचार हमारा है या फिर हमने उसे कहीं से उठाया है? जैसे आज धूल के कणों वाली बात - ये ख्याल मेरा था या किसी किताब में पढ़ा था? और अगर किसी ने पहले सोचा हो, तो क्या वह कम मेरा हो जाता है?

तुम भी आज पाँच मिनट निकालो। बस एक चीज़ देखो - रोशनी, आवाज़, गंध, कुछ भी। फिर सोचो - यह मुझे क्या याद दिलाती है? सिर्फ एक लाइन लिखो। कोई बड़ी बात नहीं, बस एक छोटा सा अहसास।

#मन #विचार #शांति #ध्यान #रोज़मर्रा

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25Sunday

आज सुबह चाय की चुस्की के साथ एक पुरानी किताब खोली जो महीनों से रैक में पड़ी थी। पहला वाक्य पढ़ते ही मन में एक सवाल उठा - "क्या मैं वही इंसान हूँ जो छह महीने पहले था?" किताब वही थी, शब्द वही थे, लेकिन उनका अर्थ अलग लग रहा था। जैसे किसी परिचित रास्ते पर चलते हुए अचानक एक नया मोड़ दिखाई दे।

दोपहर में बाजार जाते वक्त एक छोटी सी गलती हुई। मैं अपने विचारों में इतना खोया था कि गलत बस में चढ़ गया। दस मिनट बाद जब अहसास हुआ तो पहले झुंझलाहट हुई, फिर मुस्कान आ गई। क्या इसी को 'ध्यान में रहना' कहते हैं - जब शरीर एक जगह हो और मन कहीं और? उतरकर वापस आने का रास्ता ढूँढते हुए सोचा कि ये भटकना भी एक तरह की यात्रा है।

शाम को एक पुराने दोस्त का फोन आया। बातचीत में उसने कहा, "तुम्हें तो हमेशा सब कुछ समझ आ जाता है।" मैं हँसा। अगर उसे पता होता कि आधे समय मैं खुद अपने विचारों को समझने में उलझा रहता हूँ। हमने बीस मिनट बात की - उसके काम की चिंताएँ, परिवार के दबाव, और उस छोटी खुशी की जो उसे सुबह की धूप में मिली। फोन रखने के बाद महसूस हुआ कि सुनना भी एक किस्म का ध्यान है।

रात में डायरी के पन्ने पलटते हुए पिछले महीने की एक एंट्री मिली जहाँ मैंने लिखा था - "मन को शांत करना है।" आज उसी लाइन को पढ़कर लगा कि शायद मन को शांत करने से ज्यादा जरूरी है उसके शोर को समझना। जैसे किसी भीड़ वाली जगह में शोर को रोकने की जगह हम उसके बीच अपनी आवाज़ पहचानना सीखें।

एक छोटा प्रयोग: कल रात सोने से पहले पाँच मिनट के लिए कागज़ पर सिर्फ एक सवाल लिखिए - "आज मैंने किस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया?" जवाब न दें, सिर्फ सवाल लिखें। फिर देखिए अगले दिन वो सवाल आपको कैसे याद आता है।

#मन #चिंतन #दैनिकडायरी #आत्मनिरीक्षण #जीवनदर्शन

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26Monday

आज सुबह चाय बनाते समय एक छोटी सी बात पर ध्यान गया। जब पानी उबल रहा था, तो उसकी आवाज़ धीरे-धीरे बदल रही थी—पहले हल्की सी सरसराहट, फिर तेज़ बुलबुले। मैंने सोचा, क्या हमारे विचार भी ऐसे ही नहीं? शुरुआत में धीमे, फिर धीरे-धीरे तेज़ होते जाते हैं, और अगर हम ध्यान न दें तो उबल कर बाहर आ जाते हैं।

कल शाम एक दोस्त से बातचीत हुई। वो परेशान थी क्योंकि उसने किसी से कुछ कहा था जो शायद उसे नहीं कहना चाहिए था। मैंने पूछा, "क्या तुम्हें लगा कि तुम्हारे शब्द सच्चे थे?" उसने कहा, "हाँ, लेकिन शायद सही समय नहीं था।" मुझे लगा यह बहुत गहरी बात है—सच्चाई और समय का सही मेल। हम अक्सर यह मान लेते हैं कि अगर कुछ सच है तो उसे कहना सही है, लेकिन क्या सच्चाई का भी एक सही समय होता है?

दोपहर में एक छोटी सी गलती हुई। मैं एक पुरानी किताब पढ़ रही थी और एक पन्ने पर पेंसिल से निशान लगा दिया, सोचकर कि बाद में वापस आऊँगी। लेकिन जब वापस आई तो भूल गई थी कि मैंने क्यों निशान लगाया था। यह छोटी सी बात मुझे सिखा गई कि जब कुछ महत्वपूर्ण लगे, तो बस निशान नहीं, बल्कि दो-तीन शब्द लिख देना चाहिए। हमारा भविष्य का मन, वर्तमान के मन से बहुत अलग हो सकता है।

शाम को खिड़की के पास बैठी थी और बाहर की रोशनी देख रही थी—सूरज ढल रहा था और आसमान में नारंगी और गुलाबी रंग फैल रहे थे। मैंने महसूस किया कि यह रंग हर दिन अलग होते हैं, लेकिन हम अक्सर देखते नहीं। हम मान लेते हैं कि सूरज हमेशा एक जैसा ढलता है। लेकिन क्या हम भी ऐसे ही नहीं—हर दिन थोड़े अलग, लेकिन हम खुद को एक जैसा मान लेते हैं?

एक सवाल जो मन में आया: अगर आप आज सिर्फ पाँच मिनट के लिए खुद से यह पूछें कि "मैं इस पल में क्या महसूस कर रहा हूँ, और क्यों?"—तो क्या जवाब मिलेगा? कोई बड़ा जवाब नहीं चाहिए, बस एक छोटी सी पंक्ति। शायद यह छोटा सा प्रयोग हमें खुद को थोड़ा बेहतर समझने में मदद करे।

#मन #आत्मचिंतन #दर्शन #जीवन #शांति

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