Storyie
ExploreBlogPricing
Storyie
XiOS AppAndroid Beta
Terms of ServicePrivacy PolicySupportPricing
© 2026 Storyie
Anaya
@anaya
March 21, 2026•
0

आज सुबह चाय बनाते समय एक अजीब सी बात ध्यान में आई। पानी उबलने का इंतज़ार करते हुए मैं बार-बार गैस की आंच देख रही थी, जैसे मेरे देखने से पानी जल्दी उबल जाएगा। नीली लौ की गर्मी हथेली के पास महसूस होती थी, और बर्तन से हल्की-हल्की भाप उठने लगी थी। तभी मुझे लगा—हम कितनी बार ऐसा करते हैं? किसी चीज़ के होने का इंतज़ार करते हुए बेचैनी से उसे घूरते रहते हैं, जबकि प्रक्रिया अपनी गति से चल रही होती है।

मैंने एक छोटा सा प्रयोग किया। गैस से नज़र हटाकर खिड़की की तरफ देखा। बाहर एक गौरैया डाल पर बैठी थी, अपने पंख साफ कर रही थी—बिना जल्दबाज़ी, बिना किसी दबाव के। उसकी हर हरकत में एक अजीब सी पूर्णता थी, जैसे वह सिर्फ यही काम करने के लिए बनी हो। और जब मैंने दोबारा गैस की तरफ देखा, पानी उबल चुका था।

यह बात इतनी छोटी है, पर मन में कहीं गहरे बैठ गई। क्या हम अपने जीवन के उबलते पानी को घूरते-घूरते ही बीता देते हैं? नौकरी मिलने का इंतज़ार, रिश्ते सुधरने का इंतज़ार, खुशी आने का इंतज़ार। और इस इंतज़ार में गौरैया को देखना भूल जाते हैं।

दोपहर में एक पुरानी पंक्ति याद आई: "धैर्य कड़वा होता है, पर इसका फल मीठा होता है।" लेकिन आज मुझे लगा कि शायद हमने धैर्य को गलत समझा है। धैर्य का मतलब सिर्फ इंतज़ार करना नहीं—बल्कि इंतज़ार के दौरान जीवित रहना है। वर्तमान में सांस लेना है।

अगर तुम चाहो, तो एक छोटा सा प्रयोग कर सकते हो: कल जब किसी चीज़ का इंतज़ार करो—बस, लिफ्ट, या फाइल डाउनलोड होने का—तो पांच सेकंड के लिए अपनी सांस पर ध्यान दो। सिर्फ एक लंबी सांस अंदर, एक बाहर। देखो क्या बदलता है।

शायद जवाब पाने में नहीं, सवाल के साथ रहने में शांति है।

#मनऔरदर्शन #धैर्य #वर्तमान #सचेतनता #जीवनकेपल

Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Sign in to leave a comment.

More from this author

March 19, 2026

आज सुबह खिड़की से आती धूप में एक अजीब सी शांति थी। उसकी किरणें दीवार पर धीरे-धीरे खिसक रही थीं,...

March 18, 2026

आज सुबह चाय बनाते समय एक अजीब बात नोटिस की। पानी उबलने की आवाज़ सुनकर मैं वहीं खड़ी रह गई, बस सुनती...

March 17, 2026

आज सुबह चाय बनाते समय एक अजीब बात नोटिस की। पानी उबल रहा था और मैं बस खड़ी देख रही थी, लेकिन मेरा...

March 16, 2026

आज सुबह जब मैं चाय बना रही थी, तो केतली की सीटी की आवाज़ सुनकर मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी दूर अपने...

March 15, 2026

आज सुबह खिड़की से आती धूप में एक अजीब सी शांति थी। किरणें धीरे-धीरे फर्श पर फैल रही थीं, जैसे कोई...

View all posts