Storyie
BlogPricing
Storyie
XiOS AppAndroid Beta
Terms of ServicePrivacy PolicySupportPricing
© 2026 Storyie
Anaya
@anaya
March 24, 2026•
0

आज सुबह खिड़की खोलते समय मुझे हवा में गुलमोहर की हल्की खुशबू आई। अजीब बात है कि मैं पिछले तीन दिनों से उसी रास्ते से गुजर रही थी, लेकिन आज पहली बार उस सुगंध पर ध्यान गया। शायद मन जब शांत होता है, तभी हम वास्तव में चीजों को देख पाते हैं - या सूंघ पाते हैं।

दोपहर में एक पुरानी डायरी पलटते हुए मुझे अपनी एक पुरानी गलती याद आई। पिछले साल मैंने किसी बहस में जीतने की कोशिश में अपनी बहन की बात बीच में ही काट दी थी। आज उसे पढ़कर समझ आया कि सुनना केवल चुप रहना नहीं है - यह दूसरे की बात को अपने भीतर जगह देना है। जीतना और समझना, दोनों अलग-अलग चीजें हैं।

शाम को चाय बनाते समय मैंने एक छोटा-सा प्रयोग किया। पहले मैं पानी उबालते समय फोन देखती रहती थी। आज मैंने सिर्फ पानी में उभरते बुलबुलों को देखा - पहले छोटे-छोटे, फिर बड़े होते हुए। कितनी सामान्य चीज है, पर जब आप पूरी तरह मौजूद हों, तो वह भी एक ध्यान बन जाती है।

मन एक अजीब यात्री है - कभी अतीत में, कभी भविष्य में, लेकिन शायद ही कभी 'अभी' में। आज का मेरा छोटा सा अनुभव यही था - जब मैं वास्तव में उपस्थित थी, तब गुलमोहर की खुशबू थी, तब बुलबुलों की सुंदरता थी।

अगर आप चाहें तो आज रात सोने से पहले पाँच मिनट के लिए यह कोशिश करें: अपनी सांसों को गिनें, सिर्फ दस सांसें। देखें कितनी बार आपका मन भटकता है। कोई निर्णय नहीं, कोई आलोचना नहीं - बस देखना। शायद यह छोटी-सी जागरूकता कल की सुबह को थोड़ा अलग बना दे।

#मनऔरविचार #सजगता #दैनिकजीवन #आत्मनिरीक्षण

Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Sign in to leave a comment.

More from this author

June 12, 2026

आज दोपहर रोहन की माँ से मुलाकात हुई — कक्षा सातवीं। बातों के बीच उन्होंने कहा, "मैम, आप बताइए, हम...

June 10, 2026

आज दोपहर स्टाफ रूम में अनिता मैडम कह रही थीं — किसी बच्चे के बारे में, जो रोज़ कक्षा में कुछ न कुछ...

May 17, 2026

आज सुबह पड़ोसन के घर से बच्चे के रोने की आवाज़ आई — लंबी, थकी हुई, वो जो सिर्फ थकान से निकलती है,...

May 5, 2026

आज सुबह स्टाफ रूम में नताशा मैम बोल रही थीं — पाँच बजे उठकर एक घंटा वर्कआउट, तब कहीं जाकर दिन की...

April 25, 2026

आज सुबह खिड़की के पास बैठे हुए मैंने देखा कि बारिश की एक-एक बूंद कांच पर अपना रास्ता बना रही थी।...

View all posts