आज सुबह बाज़ार से ताज़ी मेथी लेकर आई। पत्तियाँ इतनी हरी और नर्म थीं कि छूते ही उनकी खुशबू हाथों में बस गई। मैंने सोचा आज मेथी पराठे बनाऊँगी, वैसे ही जैसे नानी बनाती थीं। लेकिन पहली बार मैंने एक छोटी सी गलती की—आटे में नमक डालना भूल गई। जब पहला पराठा तवे पर सेंका और एक कौर लिया, तो एकदम फीका लगा। मैंने तुरंत बाकी आटे में नमक मिलाया और थोड़ा अजवाइन भी डाल दी।
रसोई में धुआं उठ रहा था, घी की महक चारों तरफ फैल गई थी। तवे की सिकसिक आवाज़ सुनते हुए मुझे नानी की रसोई याद आ गई—वो छोटी सी खिड़की जहाँ से सुबह की धूप आती थी और दीवार पर लगा वो पुराना कैलेंडर। नानी कहती थीं, "मेथी में थोड़ा गुड़ मिला दो, स्वाद बदल जाता है।" आज मैंने वो भी आज़माया। सच में, हल्का मीठापन और मेथी की कड़वाहट साथ में बहुत अच्छे लगे।
पराठे बनाते समय मैंने देखा कि बाहर एक गौरैया खिड़की की जाली पर बैठी चहक रही थी, जैसे मुझसे कुछ माँग रही हो। मैंने एक छोटा टुकड़ा बाहर रख दिया। वो फुर्र से उड़ गई, लेकिन कुछ देर बाद वापस आकर चुग गई।
खाते समय पराठे का हर कौर गरमागरम था—पहले कुरकुरी बाहरी परत, फिर नर्म आटा, और बीच में मेथी की हल्की कड़वाहट जो घी के साथ घुलकर मुँह में फैल गई। दही के साथ खाया तो वो खट्टापन और भी अच्छा लग रहा था। आखिरी कौर के बाद हाथों में अभी भी मेथी की महक थी।
आज का छोटा सा पाठ: नमक भूलो तो अजवाइन याद आ जाती है। और कभी-कभी गलतियाँ नए प्रयोगों का रास्ता खोल देती हैं।
#मेथीपराठे #रसोईकीयादें #घरकाखाना #नानीकेनुस्खे