रात के कोई साढ़े नौ बजे, Riyaz के यहाँ उसके पुराने टर्नटेबल पर सुई उतरी। Pandit Bhimsen Joshi की...
रात के कोई साढ़े नौ बजे, Riyaz के यहाँ उसके पुराने टर्नटेबल पर सुई उतरी। Pandit Bhimsen Joshi की...
पिछले मंगलवार की रात मुकेश के फ्लैट में — दक्षिण कोलकाता का वह कमरा जहाँ छत का पंखा धीमा चलता है और...
रात के क़रीब दस बजे थे, बाहर बारिश हल्की थी — खिड़की बंद, headphones पर — जब Kumar Gandharva की...
रात के करीब दस बजे थे जब पहली बार उस रेकॉर्डिंग में दो स्वरों के बीच का वह ठहराव सुनाई दिया — पंडित...
कल रात Bhairavi में एक जगह थी — जहाँ Kishori Amonkar एक मींड को ठीक वहाँ छोड़ देती हैं जहाँ उससे...
देर रात, हेडफ़ोन पर, अकेले — बाहर बारिश की वह किस्म जो शोर नहीं करती — गिरिजा देवी की एक ठुमरी में एक जगह ध्यान ठहर गया। रिकॉर्डिंग पुरानी है, शायद सत्तर के दशक की, HMV का नाम याद आता है पर पक्का नहीं — राग भैरवी, पूरबी अंग। एक स्वर को वे छोड़ती नहीं, उसे घुमाती हैं धीरे से, जैसे कोई किसी बात को अपनी मर्ज़ी से समाप्त नहीं होने देना चाहता।
इस ठुमरी का शिल्प यही है — ताल और भाव एक-दूसरे को खींचते नहीं, साथ देते हैं। तबला पीछे है, न सहायक की तरह, बल्कि किसी ऐसे इंसान की तरह जो कमरे में हो और बोले नहीं पर मौजूद हो। harmonium की layer हल्की और ज़रूरी है — इस क़िस्म की रिकॉर्डिंग में harmonium का ज़ोर कभी-कभी आवाज़ को दबा लेता है, यहाँ ऐसा नहीं हुआ।
जो बात मुझे वापस लाती है वह यह है कि यहाँ कुछ साबित नहीं किया जा रहा था। न तकनीक, न परंपरा का हवाला। मेरी समझ में यह एक किस्म की बेफ़िक्री है जो बहुत कम रिकॉर्डिंग में मिलती है — वह भाव जहाँ गायक और राग के बीच कोई दूरी नहीं बची।
एक जगह — mid section में, जब लय थोड़ी खुलती है — recording की quality उतनी साफ़ नहीं रहती। हल्की distortion है, शायद studio की सीमा थी, शायद उस दौर की technology का हिसाब। यह गिरिजा देवी की कमी नहीं है। हो सकता है मैं ग़लत हूँ, पर मुझे लगता है यह रिकॉर्डिंग उस कमी के बावजूद नहीं, बल्कि उसके साथ काम करती है — जैसे पुरानी तस्वीर में दरारें उसे और असली बना देती हैं।
आज बारिश में सुनना अलग था। खिड़की खुली थी, ठंडी हवा आ रही थी, और शायद इसीलिए उस मीड़ को मैंने अलग तरह से सुना। मुझे नहीं पता यह recording किसी दूसरे मौसम में कैसी लगेगी — पर आज रात यह पूरी थी।
#ठुमरी_डायरी #शास्त्रीय_संगीत #गिरिजा_देवी #कोलकाता_रातें