आज सुबह 5:30 बजे जैसे ही अलार्म बजा, मैंने खुद को बिस्तर से उठने के लिए मजबूर किया। खिड़की से आती ठंडी हवा और दूर से आती चिड़ियों की आवाज़ ने मुझे याद दिलाया कि हर नया दिन एक नया मौका है। मैंने पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिया, फिर अपनी सुबह की रूटीन शुरू की।
आज की रूटीन कुछ इस तरह रही:
- 15 मिनट स्ट्रेचिंग और योग
- 30 मिनट जॉगिंग (लगभग 4 किलोमीटर)
- 20 मिनट वेट ट्रेनिंग (कंधे और बाइसेप्स)
- 10 मिनट कूलडाउन और डीप ब्रीदिंग
वर्कआउट के दौरान एक छोटी सी गलती हो गई। मैंने बिना वार्मअप के सीधे भारी वेट उठाने की कोशिश की, और मेरे कंधे में हल्का खिंचाव महसूस हुआ। मैंने तुरंत रुककर 5 मिनट और वार्मअप किया। इससे मुझे यह सीख मिली कि जल्दबाज़ी में कभी भी बेसिक्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
नाश्ते में मैंने ओट्स, केला, और बादाम खाए। खाने के बाद मैंने अपनी प्रोग्रेस जर्नल में आज का वर्कआउट नोट किया। पिछले हफ्ते के मुकाबले मेरी स्टैमिना में सुधार दिख रहा है, लेकिन मुझे अपनी रिकवरी पर ज़्यादा ध्यान देना होगा। कल मैंने देर तक ट्रेनिंग की थी और आज सुबह मेरी मांसपेशियां थोड़ी थकी हुई थीं।
दोपहर में मैंने 20 मिनट की पावर नैप ली। नींद के बाद मेरा शरीर तरोताज़ा महसूस हुआ। मैंने महसूस किया कि रिकवरी भी ट्रेनिंग जितनी ही ज़रूरी है। अक्सर हम सिर्फ़ कठिन व्यायाम पर ध्यान देते हैं और आराम को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
शाम को मैंने अपने दोस्त से बात की। उसने कहा, "भाई, तुम हर रोज़ इतनी मेहनत करते हो, कभी ब्रेक भी लो।" मैंने मुस्कुराकर कहा, "ब्रेक लेना भी मेरी रूटीन का हिस्सा है, बस सही टाइमिंग चाहिए।" उसकी बात सुनकर मुझे लगा कि शायद मुझे अपनी रिकवरी स्ट्रेटजी के बारे में दूसरों को भी बताना चाहिए।
कल का प्लान साधारण है: सुबह लाइट कार्डियो और स्ट्रेचिंग, कोई हेवी वेट नहीं। मैं अपनी मांसपेशियों को ठीक होने का पूरा मौका दूंगा। अनुशासन सिर्फ़ कड़ी मेहनत में नहीं, बल्कि स्मार्ट रिकवरी में भी है।
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