आज सुबह 5:30 बजे उठा। बाहर हल्की सर्द हवा चल रही थी, और पक्षियों की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। मैंने खुद से कहा, "आज का दिन मेरा है।" यह छोटा सा वाक्य मुझे हमेशा ऊर्जा देता है। पानी पिया, और सीधे वॉर्म-अप शुरू कर दिया।
आज की दिनचर्या:
- 5:30 AM: उठना, पानी
- 6:00 AM: वॉर्म-अप और स्ट्रेचिंग
- 6:30 AM: 5 किमी दौड़
- 7:30 AM: बॉडीवेट एक्सरसाइज (पुश-अप्स, स्क्वाट्स, प्लैंक)
- 8:30 AM: नाश्ता और प्रोटीन शेक
- 10:00 AM: योग और मेडिटेशन
- शाम 6:00 PM: हल्का वॉक और स्ट्रेचिंग
दौड़ के दौरान मैंने एक छोटी सी गलती की। मैं बहुत तेज़ शुरू कर दिया और तीसरे किलोमीटर पर मुझे लगा कि मैं थक जाऊंगा। फिर मैंने अपनी गति को थोड़ा धीमा किया और सांस पर ध्यान दिया। यह छोटा बदलाव काफी मददगार रहा। मैंने सीखा कि तेज़ शुरुआत से बेहतर है स्थिर गति बनाए रखना।
बॉडीवेट एक्सरसाइज में आज मैंने एक नया प्रयोग किया। मैंने अपने प्लैंक का समय 30 सेकंड बढ़ाया और देखा कि मेरे कोर में कितनी ताकत आ रही है। पहले महीने में मैं सिर्फ 1 मिनट का प्लैंक कर पाता था, अब मैं 2 मिनट 30 सेकंड तक पकड़ पाता हूं। यह छोटा सा बदलाव मुझे बताता है कि मेहनत का फल मिल रहा है।
शाम को योग करते समय मुझे अपने शरीर में कुछ कसाव महसूस हुई। मैंने समझा कि यह ओवरट्रेनिंग का संकेत हो सकता है। इसलिए मैंने निर्णय लिया कि कल मैं पूरी तरह से रेस्ट करूंगा। अनुशासन का मतलब सिर्फ ट्रेनिंग करना नहीं, बल्कि अपने शरीर की सुनना भी है। रिकवरी उतनी ही ज़रूरी है जितनी कि वर्कआउट।
नाश्ते में मैंने दलिया, केला, और बादाम खाया। प्रोटीन शेक में मैंने आज पीनट बटर मिलाया था—स्वाद कमाल का था! पोषण को लेकर मैं बहुत सचेत रहता हूं क्योंकि मैंने पाया है कि सही खाना मेरी ऊर्जा और मूड को बेहतर बनाता है।
आज मेरे पड़ोसी ने मुझसे पूछा, "तुम रोज़ इतनी मेहनत क्यों करते हो?" मैंने जवाब दिया, "क्योंकि मैं अपने लिए बेहतर इंसान बनना चाहता हूं।" यह सच है। फिटनेस सिर्फ शरीर के लिए नहीं, मन और आत्मा के लिए भी है।
कल की योजना: पूरी तरह से आराम करना, हल्का स्ट्रेचिंग, और अच्छी नींद लेना। अनुशासन में संतुलन ज़रूरी है।
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