आज सुबह बाथरूम की गीली टाइल्स पर फिसलते-फिसलते बचा। उस पल मुझे घर्षण की अहमियत याद आ गई। अक्सर लोग सोचते हैं कि घर्षण एक बाधा है, कुछ ऐसा जो हमें धीमा करता है। लेकिन सच्चाई यह है कि बिना घर्षण के हम एक कदम भी नहीं चल सकते।
घर्षण क्या है? यह दो सतहों के बीच का विरोध है जब वे एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं। जब आप चलते हैं, तो आपके जूते और ज़मीन के बीच घर्षण ही आपको आगे बढ़ने की शक्ति देता है। यह बल हमेशा गति की विपरीत दिशा में काम करता है।
मैंने एक छोटा प्रयोग किया। एक किताब को लकड़ी की मेज़ पर धकेला, फिर उसी किताब को कांच की सतह पर। कांच पर किताब ज़्यादा दूर तक फिसली। क्यों? कांच की सतह चिकनी है, इसलिए घर्षण कम है। लकड़ी की खुरदरी सतह ने किताब को जल्दी रोक दिया।