आज सुबह जब मैंने धातु के दरवाज़े का हैंडल छुआ, तो वह लकड़ी की मेज़ से कहीं ज़्यादा ठंडा लगा। मेरे पड़ोसी की बेटी ने पूछा, "uncle, metal ज़्यादा cold क्यों होता है?" यह एक आम ग़लतफ़हमी है जो मुझे भी कभी थी—कि अलग-अलग चीज़ें अलग-अलग temperature पर होती हैं, जबकि वे सब एक ही कमरे में रखी हैं।
असल में क्या है: एक बंद कमरे में सभी वस्तुएं लगभग एक ही temperature पर होती हैं—यह thermal equilibrium कहलाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि धातु heat को हमारी त्वचा से तेज़ी से absorb करती है, इसलिए ठंडी "महसूस" होती है। इसे thermal conductivity कहते हैं। लकड़ी poor conductor है, इसलिए वह हमारी गर्मी धीरे-धीरे लेती है और neutral लगती है।
मैंने एक छोटा सा experiment किया—एक steel spoon और एक wooden spoon को फ्रीज़ से निकाला। दोनों -5°C पर थे (thermometer से check किया), लेकिन steel वाला हाथ में चुभता-सा ठंडा लगा, wooden वाला बर्दाश्त करने लायक। यही conductivity का फ़र्क है। दिलचस्प बात यह है कि अगर मैं दस्ताने पहन लूं, तो यह अंतर कम हो जाता है—क्योंकि अब बीच में insulation की एक layer आ गई।