आज की गलतफहमी: गुरुत्वाकर्षण केवल नीचे की ओर खींचता है। सुबह मेरे पास एक छात्र ने पूछा, "सर, अगर गुरुत्वाकर्षण हमेशा नीचे खींचता है, तो चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर क्यों घूमता है?" यह सवाल बिल्कुल सही था।
गुरुत्वाकर्षण वास्तव में दो वस्तुओं के बीच एक आकर्षण बल है। न्यूटन का सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम बताता है कि प्रत्येक द्रव्यमान वाली वस्तु हर दूसरी द्रव्यमान वाली वस्तु को अपनी ओर खींचती है। पृथ्वी हमें नीचे खींचती है, लेकिन हम भी पृथ्वी को ऊपर खींचते हैं—बस इतना कम कि हम इसे महसूस नहीं कर सकते। द्रव्यमान जितना बड़ा, बल उतना ही अधिक। पृथ्वी का द्रव्यमान विशाल है, इसलिए उसका खिंचाव प्रभावी होता है।
चंद्रमा का उदाहरण लेते हैं। पृथ्वी चंद्रमा को अपनी ओर खींचती है, लेकिन चंद्रमा की गति इतनी तेज है कि वह सीधी रेखा में आगे बढ़ना चाहता है। ये दोनों बल संतुलित होते हैं, और चंद्रमा एक अंडाकार कक्षा में घूमता रहता है। यह ऐसा है जैसे आप एक गेंद को डोरी से बांधकर घुमाते हैं—डोरी का तनाव गेंद को केंद्र की ओर खींचता है, लेकिन गेंद की गति उसे बाहर की ओर धकेलती है। दोनों मिलकर एक चक्र बनाते हैं।