आज सुबह छत पर चाय पीते हुए मैंने आसमान की ओर देखा। साफ नीला, बिना बादलों का। मेरे पड़ोसी की बेटी ने पूछा, "अंकल, आसमान नीला क्यों होता है?" मैंने सोचा यह सवाल कितना आम है, फिर भी कितने लोग सही जवाब जानते हैं?
गलतफहमी: बहुत से लोग सोचते हैं कि आसमान नीला है क्योंकि वह समुद्र को reflect करता है। यह पूरी तरह गलत है। असल में यह प्रकाश और वायुमंडल के अणुओं के बीच की interaction है।
असली कारण: जब सूर्य का सफेद प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वह हवा के छोटे-छोटे अणुओं से टकराता है। नीली रोशनी की wavelength छोटी होती है (लगभग 450 नैनोमीटर), इसलिए यह अधिक scatter होती है। इस process को Rayleigh scattering कहते हैं। लाल रोशनी की wavelength बड़ी होती है, इसलिए वह सीधे निकल जाती है।
मैंने उसे एक उदाहरण दिया: "सोचो कि तुम एक कमरे में छोटी-छोटी गेंदें फेंक रही हो। छोटी गेंदें furniture से अधिक टकराएंगी, बड़ी गेंदें सीधे निकल जाएंगी। ठीक वैसे ही नीली रोशनी हर दिशा में scatter होती है।"
सीमाएं: शाम को आसमान लाल क्यों हो जाता है? क्योंकि सूर्य की किरणें अधिक distance तय करती हैं, सारी नीली रोशनी scatter हो चुकी होती है, सिर्फ लाल बचती है। मंगल ग्रह पर आसमान लाल दिखता है क्योंकि वहां धूल के कण अलग तरह से scatter करते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष: अगली बार जब आप आसमान देखें, याद रखिए कि हर रंग एक अलग कहानी बताता है। विज्ञान हमारे चारों ओर है, बस देखने का नज़रिया चाहिए। छोटे सवालों में बड़े जवाब छिपे होते हैं।
#विज्ञान #प्रकाश #जिज्ञासा #सीखना