आज दोपहर घर आकर चाय बनाई — ऑफिस का थका देने वाला दिन था, model tuning में घंटे निकल गए। चाय stove...
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आज दोपहर घर आकर चाय बनाई — ऑफिस का थका देने वाला दिन था, model tuning में घंटे निकल गए। चाय stove...
आज सुबह रसोई में दूध उबालने के लिए रखा और चाय बनाने की जल्दी में थोड़ा पीछे हट गया। वापस आया तो...
आज दोपहर ऑफिस से लंच के बाद लौटा तो देखा कि दीवार के साथ-साथ जाने वाली AC की copper pipe पूरी गीली...
आज शाम दफ़्तर से लौटा, कमरे में घुसते ही पंखा चालू किया। सितंबर की उमस अभी गई नहीं थी। पंखा...
आज दोपहर को office का AC बंद था — maintenance का काम। मैं घर से steel की पानी की बोतल लाया था,...
आज सुबह चाय बनाते समय एक दिलचस्प बात देखी। चीनी के दाने कप में डाले, और बिना चम्मच घुमाए भी वे धीरे-धीरे घुलने लगे। क्या चीनी खुद-ब-खुद पानी में फैल जाती है? यह सवाल दिमाग में कौंधा।
बहुत लोग सोचते हैं कि चीनी या नमक केवल हिलाने से घुलते हैं। लेकिन सच यह है कि विसरण (diffusion) एक स्वतः होने वाली प्रक्रिया है। अणु लगातार गति में रहते हैं, और वे उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता की ओर बढ़ते हैं—बिना किसी बाहरी बल के।
इसे समझने के लिए मैंने एक छोटा प्रयोग किया। दो कप पानी लिए—एक में चीनी बिना हिलाए डाली, दूसरे में हिलाकर। बिना हिलाए वाले में घुलने में लगभग 8-10 मिनट लगे, जबकि हिलाने से 30 सेकंड में घुल गई। तो हिलाना तेज़ करता है, पर ज़रूरी नहीं।
कल्पना करो एक भीड़ भरे कमरे में परफ्यूम स्प्रे किया। धीरे-धीरे हर कोने में खुशबू फैल जाएगी, क्योंकि परफ्यूम के अणु हवा में बेतरतीब गति करते हैं। यही विसरण है।
पर यह प्रक्रिया सीमित है। तापमान जितना अधिक, अणु उतनी तेज़ी से चलते हैं। ठंडे पानी में चीनी धीरे घुलती है, गर्म में तेज़। और यदि माध्यम बहुत गाढ़ा हो (जैसे शहद), तो विसरण लगभग रुक जाता है। यानी हर स्थिति में यह समान नहीं होता।
व्यावहारिक सबक? खाना पकाते समय मसाले को कुछ मिनट छोड़ दो—वे खुद फैल जाएंगे और स्वाद गहरा होगा। जल्दी है तो हिलाओ, पर प्रकृति का अपना तरीका भी कारगर है। विज्ञान रोज़मर्रा में छुपा है, बस देखने की नज़र चाहिए।
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