Storyie
ExploreBlogPricing
Storyie
XiOS AppAndroid Beta
Terms of ServicePrivacy PolicySupportPricing
© 2026 Storyie
Rohit
@rohit
January 22, 2026•
0

सुबह बाहर निकला तो सड़क के किनारे एक पुराना दूधवाला अपनी साइकिल पर दूध की कैन लेकर निकल रहा था। घंटी की आवाज़ सुनकर कुछ बच्चे दौड़ते हुए आए, और वह मुस्कुराकर उन्हें देखने लगा। मैंने सोचा कि आज के ज़माने में ऐसे दृश्य कितने दुर्लभ हो गए हैं—ज़्यादातर लोग अब ऑनलाइन ऑर्डर करते हैं, दरवाज़े तक डिलीवरी चाहते हैं। पर यहाँ, इस गली में, समय थोड़ा धीमा चलता है।

आगे बढ़ते हुए मैं उस पार्क के पास पहुँचा जहाँ रोज़ सुबह कुछ बुज़ुर्ग लोग योग करते हैं। एक बुजुर्ग सज्जन ने मुझसे पूछा, "बेटा, तुम रोज़ इधर से निकलते हो, कभी रुककर बैठते क्यों नहीं?" मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "अगली बार ज़रूर।" पर सच तो यह है कि हम अक्सर चलते रहते हैं, बिना रुके, बिना सोचे कि कहाँ जा रहे हैं। शायद कभी-कभी रुकना भी ज़रूरी है।

रास्ते में एक छोटी दुकान दिखी जहाँ ताज़ी चाय की महक आ रही थी। मैंने एक कप लिया और दुकानदार से पूछा, "आप यहाँ कब से हैं?" उसने कहा, "तीस साल से।" मुझे हैरानी हुई—तीस साल एक ही जगह! मैं तो हर कुछ सालों में शहर बदल लेता हूँ। उसने कहा, "यहाँ हर रोज़ नए चेहरे आते हैं, पर कुछ पुराने ग्राहक अभी भी आते हैं।" यह सुनकर मुझे लगा कि शायद स्थिरता में भी एक अलग तरह की यात्रा होती है।

चाय पीते हुए मैंने ग़ौर किया कि सड़क के किनारे एक पुराना पेड़ है, जिसकी छाया में लोग अक्सर बैठते हैं। एक औरत अपने बच्चे को वहाँ झूला झुला रही थी। पेड़ की छाल पर किसी ने नाम लिखा हुआ था—"राज + मीना, 1998।" मुझे सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि यह पेड़ कितनी कहानियों का गवाह रहा होगा। हम सब कुछ समय के लिए यहाँ होते हैं, पर कुछ निशान छोड़ जाते हैं।

मैं वापस घर की ओर चल पड़ा, सोचते हुए कि शहर में चलना सिर्फ़ एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं है—यह देखने, सुनने, और महसूस करने का एक तरीक़ा है। कल फिर निकलूँगा, शायद किसी और रास्ते से, शायद किसी और दुकान पर चाय पिऊँगा। पर एक बात तय है—हर दिन कुछ नया सिखाता है, अगर हम ध्यान दें तो।

क्या हम अपनी रोज़मर्रा की यात्राओं में वाक़ई ध्यान देते हैं, या बस आदत में चलते रहते हैं?

#शहर #यात्रा #रोज़मर्रा #सड़क #चाय

Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Sign in to leave a comment.

More from this author

March 25, 2026

आज सुबह की चहलकदमी में एक अजीब बात देखी। पुराने बाजार की गली में एक चाय वाले ने अपनी दुकान के बाहर...

March 24, 2026

आज सुबह पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमते हुए एक अजीब सी बात देखी। चांदनी चौक के पास एक छोटी सी चाय...

March 23, 2026

आज सुबह पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमते हुए एक अजीब बात नोटिस की। चाँदनी चौक के पास एक छोटी सी...

March 22, 2026

आज सुबह पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमते हुए एक अजीब सी बात नज़र आई। चांदनी चौक के पास, जहाँ हर...

March 21, 2026

आज सुबह छह बजे निकला था, सोचा था कि शनिवार की भीड़ से पहले पुराने शहर के उन गलियों में घूम आऊं जो...

View all posts