आज का इरादा था — चाँदनी चौक मेट्रो से निकलकर पुराने बाज़ार की तरफ़ पैदल, फिर नली-वाली गली होते हुए...
आज का इरादा था — चाँदनी चौक मेट्रो से निकलकर पुराने बाज़ार की तरफ़ पैदल, फिर नली-वाली गली होते हुए...
आज का plan था Chandni Chowk मेट्रो से निकलकर Kashmere Gate तक पैदल जाना। दूरी ज़्यादा नहीं — तीन...
आज का इरादा था — लाल किला मेट्रो से चाँदनी चौक तक पैदल, बीच में जो भी आए। दूरी ज़्यादा नहीं, शायद...
आज सोचा था कि जामा मस्जिद से चाँदनी चौक तक पैदल निकलूँगा — बस दो स्टेशनों के बीच का फ़ासला, कितना...
आज का इरादा था — लाल क़िले वाले मेट्रो स्टेशन से नेताजी सुभाष मार्ग होते हुए चाँदनी चौक तक पैदल...
आज सुबह की सैर के दौरान एक अजीब बात नोटिस की – पुराने बाज़ार की गली में जो चाय की दुकान है, वहाँ की दीवार पर किसी ने लिख दिया था "यहाँ रुकना मना है"। मज़ेदार बात ये थी कि ठीक उसी दीवार के सामने तीन लोग कुर्सियों पर बैठे चाय पी रहे थे। मैंने सोचा, शायद लिखने वाले का मतलब कुछ और था, या फिर हम सबने मिलकर उसकी बात को नज़रअंदाज़ करने का फ़ैसला किया है।
गली में आगे बढ़ते हुए एक पुरानी किताबों की दुकान दिखी। दुकानदार ने मुझसे पूछा, "क्या चाहिए भाई?" मैंने कहा, "बस देख रहा हूँ।" उसने मुस्कुराते हुए कहा, "देखना भी एक ख़रीदारी है, बस पैसे नहीं लगते।" उसकी बात में कितनी सच्चाई थी।
मैंने एक छोटा सा प्रयोग किया आज – हमेशा मैं बाएँ तरफ़ से बाज़ार में घुसता हूँ, आज दाएँ से गया। पूरा नज़ारा ही बदल गया। वही दुकानें, वही रास्ता, लेकिन कोण बदलते ही सब कुछ नया लग रहा था। एक पेड़ जो मुझे कभी दिखा नहीं था, वो आज एकदम सामने था। शायद हम जिस दिशा से चलते हैं, वो तय करती है कि हम क्या देखेंगे।
गलती से एक गलत गली में मुड़ गया और पाया कि वहाँ एक छोटा सा पार्क है जिसके बारे में मुझे पता ही नहीं था। बच्चे खेल रहे थे, कुछ बुज़ुर्ग बेंच पर बैठे धूप सेंक रहे थे। मैंने सोचा, कभी-कभी रास्ता भटकना भी ज़रूरी है।
अब सोच रहा हूँ, अगली बार कौन सा रास्ता चुनूँ? शायद कोई ऐसा जो मैंने कभी नहीं लिया। क्या पता, क्या मिल जाए?
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