आज का इरादा था — Lal Qila मेट्रो से Delhi Gate तक पैदल, सीधी सड़क, बहुत दूर नहीं। पर गेट से निकलते ही दिशा का कोई अंदाज़ा नहीं रहा। दस-बारह मिनट मैं Daryaganj की तरफ बढ़ता रहा, जब एक ऑटो वाले ने रुककर पूछा, "भाई, कहाँ जाना है?" — तब जाकर समझ आया कि मेरा फ़ोन उत्तर की बजाय दक्षिण दिखा रहा था। गूगल मैप उल्टा पकड़ा था, शुरू से।
मुड़ा और ठीक दिशा में चलने लगा। नेताजी सुभाष मार्ग के बाईं तरफ एक पुरानी तीन-मंज़िला इमारत है — रंग कभी नीला रहा होगा, अब वो एक थका हुआ धूसर है। ऊपर एक धुंधला बोर्ड टँगा है: "श्री गणेश ट्रेडर्स, स्थापित 1971 से।" "से" के आगे कुछ था — शायद कोई साल, शायद कोई दावा — मिट गया। लगता है 1971 से बहुत कुछ हो चुका है, बोर्ड का वो टुकड़ा भी।
एक बंद दुकान की सीढ़ी पर बैठकर पास की थड़ी से चाय माँगी। कुल्हड़ में आई — कच्ची मिट्टी की गंध पहले आई, चाय बाद में। पहला घूंट लेते ही अदरक की वो कड़वाहट जो गले के पिछले हिस्से में जाकर रुकती है — बिल्कुल वैसी ही थी। थड़ी वाले को नमस्ते बोला तो उसने हँसकर कहा, "पहली बार आए हो?" मेरा नमस्ते उसे पहचान का नहीं लगा था — अजनबी का लगा। चाय पाँच रुपये की थी और वो हँसी मुफ़्त।