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kiran
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January 2026

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22Thursday

आज सुबह पांच बजे उठा, बाहर ठंडी हवा चल रही थी। सर्दी में सुबह की यह ठंडक शरीर को झकझोर देती है, लेकिन यही तो असली परीक्षा है। गर्म रजाई छोड़कर बाहर निकलना, यह अनुशासन का पहला पाठ है। पार्क में पहुँचा तो देखा कि कुछ लोग पहले से ही दौड़ रहे थे। मैंने भी अपनी वार्म-अप शुरू की।

आज का वर्कआउट:

  • 10 मिनट वार्म-अप (स्ट्रेचिंग और जॉगिंग)
  • 30 मिनट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (पुश-अप्स, स्क्वाट्स, प्लैंक)
  • 20 मिनट कार्डियो (दौड़)
  • 5 मिनट कूल-डाउन

आज एक छोटी सी गलती हुई। स्क्वाट्स करते समय मैंने फॉर्म पर ध्यान नहीं दिया, और घुटनों में हल्का दर्द महसूस हुआ। तुरंत रुका और एक बुजुर्ग ट्रेनर ने मुझे सही तरीका समझाया। उन्होंने कहा, "बेटा, वजन बढ़ाने से पहले फॉर्म सीखो। यही सबसे बड़ा अनुशासन है।" उनकी बात दिल में उतर गई। कभी-कभी हम जल्दबाजी में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन सही तरीका ही लंबे समय तक टिकने का रास्ता है।

दोपहर में आराम किया। रिकवरी भी उतनी ही जरूरी है जितनी ट्रेनिंग। शरीर को ठीक होने का समय नहीं दिया, तो चोट लगना तय है। मैंने हल्की स्ट्रेचिंग की और एक किताब पढ़ी। आराम का मतलब आलस नहीं, बल्कि शरीर को फिर से तैयार करना है।

शाम को मैंने एक छोटा प्रयोग किया। मैंने अपने प्रोटीन शेक में थोड़ा शहद मिलाया, पहले मैं बिना शहद के पीता था। स्वाद में सुधार हुआ, और ऊर्जा भी थोड़ी ज्यादा महसूस हुई। छोटे बदलाव भी बड़ा फर्क ला सकते हैं।

आज मैंने यह समझा कि अनुशासन का मतलब सिर्फ कठोर होना नहीं, बल्कि अपने शरीर को समझना और सही तरीके से काम करना है। गलतियाँ होंगी, लेकिन हर गलती एक सबक है। कल मैं स्क्वाट्स का फॉर्म फिर से सीखूंगा, और इस बार सही तरीके से करूंगा। धीरे-धीरे, लेकिन सही दिशा में आगे बढ़ना ही असली जीत है।

#फिटनेस #अनुशासन #रिकवरी #ट्रेनिंग #स्वास्थ्य

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23Friday

यह सुबह का सत्र थोड़ा कठिन था। मैंने 5:30 बजे अलार्म सुना, लेकिन बिस्तर से उठने में पांच मिनट ज्यादा लग गए। गर्म पानी में नींबू डालकर पीया और छत पर पहुंच गया। ठंडी हवा चल रही थी, आसमान में हल्का गुलाबी रंग फैल रहा था। सांस लेने में अभी भी वह ताजगी है जो सर्दियों की सुबह ही देती है।

आज का workout routine:

  • 10 मिनट warm-up stretching
  • 4 सेट push-ups (प्रत्येक 20)
  • 3 सेट squats (प्रत्येक 25)
  • Plank hold (कुल 3 मिनट, 3 राउंड में)
  • 15 मिनट cool-down yoga

Push-ups के दौरान मुझे एहसास हुआ कि मैं जल्दी-जल्दी कर रहा हूं। गति तेज करने से संख्या तो बढ़ जाती है, लेकिन फॉर्म खराब हो जाता है। तीसरे सेट में मैंने धीमा किया और हर repetition को पूरा stretch के साथ किया। कंधों में वह tension महसूस हुई जो सही form से ही आती है। यह छोटी सी गलती मुझे याद दिलाती है कि अनुशासन केवल उठने में नहीं, बल्कि हर movement में होना चाहिए।

दोपहर को एक दोस्त ने पूछा, "रोज़ इतना कठोर schedule, कभी थकान नहीं होती?" मैंने कहा, "थकान होती है, इसलिए रविवार को पूरा rest लेता हूं।" Recovery भी training का हिस्सा है। इसे ignore करना शरीर के साथ धोखा है। आजकल मैं active recovery को ज्यादा महत्व दे रहा हूं—रविवार को हल्की walk या gentle stretching।

शाम को मैंने अपना protein shake में केला और बादाम butter मिलाया। पहले मैं सोचता था कि केवल plain whey ही काम करेगा, लेकिन स्वाद में थोड़ा variation मानसिक संतुष्टि भी देता है। Discipline का मतलब बोरियत नहीं है; यह अपने routine में छोटे-छोटे सुधार करने की कला है।

मुझे जिम नहीं जाना पड़ता क्योंकि मैंने घर पर ही सारा setup बना रखा है। आज मैंने resistance bands के साथ कुछ नए exercises try किए। पहले attempt में form गलत था, लेकिन दूसरी बार धीरे-धीरे focus के साथ किया तो सही लगा। यह सीख हर दिन मिलती है—patience और adjustment।

आज की एक बड़ी सीख: speed से ज्यादा quality मायने रखती है। मैं हमेशा यह सोचता था कि ज्यादा reps करने से तेज progress होगा, लेकिन अब समझ आ रहा है कि proper form और controlled movements ही असली ताकत बनाते हैं। कल मैं अपनी workout diary में यह note करूंगा और अगले सप्ताह हर exercise में tempo control पर काम करूंगा।

कल सुबह मैं उसी वक्त उठूंगा, लेकिन warm-up में एक extra मिनट दूंगा। शरीर को सुनना सीखना भी अनुशासन का हिस्सा है। रात को 9:30 तक सो जाना है—नींद recovery का सबसे powerful tool है।

#फिटनेस #अनुशासन #होमवर्कआउट #रिकवरी #ट्रेनिंग

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24Saturday

आज सुबह 5:30 बजे उठा। बाहर हल्की सर्द हवा चल रही थी, और पक्षियों की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। मैंने खुद से कहा, "आज का दिन मेरा है।" यह छोटा सा वाक्य मुझे हमेशा ऊर्जा देता है। पानी पिया, और सीधे वॉर्म-अप शुरू कर दिया।

आज की दिनचर्या:

  • 5:30 AM: उठना, पानी
  • 6:00 AM: वॉर्म-अप और स्ट्रेचिंग
  • 6:30 AM: 5 किमी दौड़
  • 7:30 AM: बॉडीवेट एक्सरसाइज (पुश-अप्स, स्क्वाट्स, प्लैंक)
  • 8:30 AM: नाश्ता और प्रोटीन शेक
  • 10:00 AM: योग और मेडिटेशन
  • शाम 6:00 PM: हल्का वॉक और स्ट्रेचिंग

दौड़ के दौरान मैंने एक छोटी सी गलती की। मैं बहुत तेज़ शुरू कर दिया और तीसरे किलोमीटर पर मुझे लगा कि मैं थक जाऊंगा। फिर मैंने अपनी गति को थोड़ा धीमा किया और सांस पर ध्यान दिया। यह छोटा बदलाव काफी मददगार रहा। मैंने सीखा कि तेज़ शुरुआत से बेहतर है स्थिर गति बनाए रखना।

बॉडीवेट एक्सरसाइज में आज मैंने एक नया प्रयोग किया। मैंने अपने प्लैंक का समय 30 सेकंड बढ़ाया और देखा कि मेरे कोर में कितनी ताकत आ रही है। पहले महीने में मैं सिर्फ 1 मिनट का प्लैंक कर पाता था, अब मैं 2 मिनट 30 सेकंड तक पकड़ पाता हूं। यह छोटा सा बदलाव मुझे बताता है कि मेहनत का फल मिल रहा है।

शाम को योग करते समय मुझे अपने शरीर में कुछ कसाव महसूस हुई। मैंने समझा कि यह ओवरट्रेनिंग का संकेत हो सकता है। इसलिए मैंने निर्णय लिया कि कल मैं पूरी तरह से रेस्ट करूंगा। अनुशासन का मतलब सिर्फ ट्रेनिंग करना नहीं, बल्कि अपने शरीर की सुनना भी है। रिकवरी उतनी ही ज़रूरी है जितनी कि वर्कआउट।

नाश्ते में मैंने दलिया, केला, और बादाम खाया। प्रोटीन शेक में मैंने आज पीनट बटर मिलाया था—स्वाद कमाल का था! पोषण को लेकर मैं बहुत सचेत रहता हूं क्योंकि मैंने पाया है कि सही खाना मेरी ऊर्जा और मूड को बेहतर बनाता है।

आज मेरे पड़ोसी ने मुझसे पूछा, "तुम रोज़ इतनी मेहनत क्यों करते हो?" मैंने जवाब दिया, "क्योंकि मैं अपने लिए बेहतर इंसान बनना चाहता हूं।" यह सच है। फिटनेस सिर्फ शरीर के लिए नहीं, मन और आत्मा के लिए भी है।

कल की योजना: पूरी तरह से आराम करना, हल्का स्ट्रेचिंग, और अच्छी नींद लेना। अनुशासन में संतुलन ज़रूरी है।

#फिटनेस #अनुशासन #ट्रेनिंग #स्वास्थ्य

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25Sunday

आज सुबह 5:30 बजे जैसे ही अलार्म बजा, मैंने खुद को बिस्तर से उठने के लिए मजबूर किया। खिड़की से आती ठंडी हवा और दूर से आती चिड़ियों की आवाज़ ने मुझे याद दिलाया कि हर नया दिन एक नया मौका है। मैंने पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिया, फिर अपनी सुबह की रूटीन शुरू की।

आज की रूटीन कुछ इस तरह रही:

  • 15 मिनट स्ट्रेचिंग और योग
  • 30 मिनट जॉगिंग (लगभग 4 किलोमीटर)
  • 20 मिनट वेट ट्रेनिंग (कंधे और बाइसेप्स)
  • 10 मिनट कूलडाउन और डीप ब्रीदिंग

वर्कआउट के दौरान एक छोटी सी गलती हो गई। मैंने बिना वार्मअप के सीधे भारी वेट उठाने की कोशिश की, और मेरे कंधे में हल्का खिंचाव महसूस हुआ। मैंने तुरंत रुककर 5 मिनट और वार्मअप किया। इससे मुझे यह सीख मिली कि जल्दबाज़ी में कभी भी बेसिक्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

नाश्ते में मैंने ओट्स, केला, और बादाम खाए। खाने के बाद मैंने अपनी प्रोग्रेस जर्नल में आज का वर्कआउट नोट किया। पिछले हफ्ते के मुकाबले मेरी स्टैमिना में सुधार दिख रहा है, लेकिन मुझे अपनी रिकवरी पर ज़्यादा ध्यान देना होगा। कल मैंने देर तक ट्रेनिंग की थी और आज सुबह मेरी मांसपेशियां थोड़ी थकी हुई थीं।

दोपहर में मैंने 20 मिनट की पावर नैप ली। नींद के बाद मेरा शरीर तरोताज़ा महसूस हुआ। मैंने महसूस किया कि रिकवरी भी ट्रेनिंग जितनी ही ज़रूरी है। अक्सर हम सिर्फ़ कठिन व्यायाम पर ध्यान देते हैं और आराम को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

शाम को मैंने अपने दोस्त से बात की। उसने कहा, "भाई, तुम हर रोज़ इतनी मेहनत करते हो, कभी ब्रेक भी लो।" मैंने मुस्कुराकर कहा, "ब्रेक लेना भी मेरी रूटीन का हिस्सा है, बस सही टाइमिंग चाहिए।" उसकी बात सुनकर मुझे लगा कि शायद मुझे अपनी रिकवरी स्ट्रेटजी के बारे में दूसरों को भी बताना चाहिए।

कल का प्लान साधारण है: सुबह लाइट कार्डियो और स्ट्रेचिंग, कोई हेवी वेट नहीं। मैं अपनी मांसपेशियों को ठीक होने का पूरा मौका दूंगा। अनुशासन सिर्फ़ कड़ी मेहनत में नहीं, बल्कि स्मार्ट रिकवरी में भी है।

#फिटनेस #अनुशासन #ट्रेनिंग #रिकवरी #योग

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26Monday

आज सुबह 5 बजे अलार्म की आवाज़ से पहले ही आँख खुल गई। बाहर हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और खिड़की से आती रोशनी में धुंध की हल्की परत दिख रही थी। पानी का एक गिलास पिया, हल्का स्ट्रेचिंग किया, और 20 मिनट का वार्म-अप शुरू किया। शरीर थोड़ा भारी लग रहा था—शायद कल की लेग डे की वजह से—लेकिन मैंने खुद से कहा, "थकान असली नहीं है, बस मन का खेल है।"

जिम में पहुँचकर पहले 10 मिनट रनिंग की। फिर अपर बॉडी का सेशन शुरू किया: पुश-अप्स 4 सेट्स (15 रेप्स), डंबल प्रेस 3 सेट्स (12 रेप्स), पुल-अप्स 3 सेट्स (8 रेप्स), और शोल्डर प्रेस 3 सेट्स (10 रेप्स)। आज एक छोटी गलती हुई—तीसरे सेट में फॉर्म टूट गया क्योंकि मैंने जल्दबाज़ी में वजन बढ़ा दिया। तुरंत रुका, वजन कम किया, और सही फॉर्म के साथ दोबारा किया। फॉर्म हमेशा वजन से ज़्यादा महत्वपूर्ण है—यह बात मुझे बार-बार याद दिलानी पड़ती है।

सेशन के बाद 15 मिनट का कूल-डाउन और स्ट्रेचिंग किया। शावर लेते समय गर्म पानी ने मांसपेशियों को राहत दी। नाश्ते में ओट्स, केला, और एक स्कूप प्रोटीन—सादा लेकिन असरदार। क्या यह बोरिंग है? हाँ, थोड़ा। लेकिन क्या यह काम करता है? बिल्कुल। अनुशासन का मतलब यही है: हर रोज़ वही सही चीज़ें करना, चाहे मन हो या न हो।

दोपहर में एक दोस्त ने पूछा, "तुम इतना स्ट्रिक्ट क्यों हो? थोड़ा आराम क्यों नहीं करते?" मैंने कहा, "भाई, आराम तो मैं हर रात 8 घंटे सोकर करता हूँ। और हर हफ्ते एक रेस्ट डे भी लेता हूँ। लेकिन ट्रेनिंग के समय पूरी मेहनत देनी पड़ती है।" उसने सोचा, फिर बोला, "समझ आया।" रिकवरी भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी ट्रेनिंग—यह बात बहुत कम लोग समझते हैं।

शाम को हल्का योग किया—5 मिनट का प्राणायाम और 10 मिनट की स्ट्रेचिंग। शरीर में हल्कापन महसूस हुआ। रात का खाना सादा रखा: दाल, चावल, सब्ज़ी, और सलाद। खाने के बाद 10 मिनट टहला, फिर कल की प्लानिंग की।

कल का लक्ष्य: सुबह 6 बजे कार्डियो सेशन, और शाम को कोर वर्कआउट। एक नई एक्सरसाइज़ ट्राई करूँगा—हैंगिंग लेग रेज़। देखते हैं कितनी रेप्स कर पाता हूँ। छोटे-छोटे सुधार हर रोज़, यही असली तरक्की है।

#फिटनेस #अनुशासन #ट्रेनिंग #रिकवरी #स्वस्थजीवन

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