आज सुबह स्टाफ रूम में सुना — एक सहकर्मी किसी से कह रही थीं, "वो बच्चा बस ध्यान खींचने के लिए करता है।" वाक्य पूरा होने से पहले ही कंधे थोड़े ऊपर चले गए। छाती में एक हल्की जकड़न। यह थकान नहीं थी, यह कुछ और था — शायद विरोध, या उस बच्चे की तरफ से कुछ जो मैं महसूस कर रही थी जो मुझे करना नहीं था।
बाद में मैंने अलग करके देखा: शरीर का संकेत था — कंधे, जकड़न। विचार था — "यह परिभाषा गलत है।" भावना थी — एक अजीब सी तकलीफ जो मेरी नहीं थी, फिर भी थी। तीनों अलग थे, पर पहले एक ही गांठ लग रहे थे।
इस हफ्ते का प्रयोग चल रहा है — रात 9 बजे के बाद फोन नीचे रखना, और सोने से पहले सिर्फ एक लाइन लिखना: "आज शरीर में क्या था?" तीसरा दिन है।
- परिकल्पना: अगर मैं स्क्रीन और नींद के बीच थोड़ा खालीपन रखूँ, तो सुबह का पहला मूड थोड़ा कम धुंधला होगा।
- जाँच: सात दिन बाद सुबह की पहली भावना नोट करना।
- अब तक: पहली रात बेचैनी थी — हाथ अपने आप फोन की तरफ गया दो बार। दूसरी रात थोड़ा आसान। आज सुबह उठी तो कंधे ज़्यादा नीचे थे, हालाँकि यह सिर्फ एक दिन का डेटा है।
स्टाफ रूम की वह बात अभी भी कहीं है। मैं उसे सुधारने नहीं गई, कुछ बोला भी नहीं। वह चुप्पी मैंने चुनी थी — पर नहीं जानती अभी यह सही था या नहीं। एक सवाल रह गया: क्या मेरी चुप्पी उस बच्चे के लिए थी, या अपनी ऊर्जा बचाने के लिए?
कल देखूँगी — सुबह उठते ही पहला विचार क्या है। और वह कंधे की जकड़न कब आती है, किस संदर्भ में।
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