सुबह पाँच बजे अलार्म बजा, लेकिन आज मैंने स्नूज़ बटन दबा दिया। सिर्फ पाँच मिनट के लिए, मैंने सोचा। लेकिन जब आँख खुली तो साढ़े पाँच बज चुके थे। यह छोटी सी गलती मुझे याद दिला गई कि अनुशासन सिर्फ बड़े फैसलों में नहीं, बल्कि हर पल के छोटे-छोटे चुनावों में होता है। फिर भी, मैं उठा, जूते पहने, और दौड़ने निकल गया।
बाहर की ठंडी हवा में एक अजीब सी ताज़गी थी। सड़क पर पत्तों की सरसराहट, दूर से आती चाय की दुकान से उठती भाप की महक - ये सब मुझे याद दिलाते हैं कि सुबह की ट्रेनिंग सिर्फ शरीर के लिए नहीं, मन के लिए भी ज़रूरी है। आठ किलोमीटर की दौड़ में मेरे घुटने में हल्का दर्द महसूस हुआ। पहले मैं इसे नज़रअंदाज़ कर देता, लेकिन आज मैंने रफ़्तार कम की। रिकवरी भी ट्रेनिंग का हिस्सा है, यह बात मुझे बार-बार याद दिलानी पड़ती है।
जिम में आज कुछ अलग करने का मन किया। आमतौर पर मैं पहले कंधे और फिर पीठ की एक्सरसाइज़ करता हूँ, लेकिन आज मैंने क्रम बदल दिया। पहले पीठ, फिर कंधे। छोटा सा बदलाव, लेकिन मांसपेशियों ने अलग तरह से प्रतिक्रिया दी। शायद शरीर को भी कभी-कभी सरप्राइज़ चाहिए होता है।