आज सुबह बाज़ार से ताज़ी हरी धनिया की खुशबू लेकर लौटी। पत्तियाँ इतनी हरी थीं कि लगा जैसे बारिश के बाद की घास हो। जड़ों मे...
आज सुबह बाज़ार से ताज़ी हरी धनिया की खुशबू लेकर लौटी। पत्तियाँ इतनी हरी थीं कि लगा जैसे बारिश के बाद की घास हो। जड़ों मे...
आज सुबह खिड़की के पास बैठी थी जब एक पुरानी कविता की पंक्ति याद आई—"शब्द वही होते हैं जो चुप्पी को तोड़ते हैं, बाकी सब शो...
आज सुबह खिड़की से आती धूप में एक अजीब सी सुनहरी चमक थी। मैं चाय बनाते समय यह देख रही थी कि कैसे भाप की लहरें उस रोशनी मे...
सूरज ढलने के बाद की वह घड़ी थी जब आसमान न दिन का रहता है न रात का। मैं छत पर बैठी थी, एक पुरानी डायरी और कलम हाथ में, ले...
आज सुबह मेरी कॉफी की चुस्की के साथ एक छोटी सी खोज हुई। मैंने अपनी पुरानी नोटबुक को देखा तो पाया कि पिछले महीने के सभी का...
आज सुबह की चहलकदमी में एक अजीब बात देखी। पुराने बाजार की गली में एक चाय वाले ने अपनी दुकान के बाहर एक छोटा सा बोर्ड लगाय...
आज सुबह किचन में घुसते ही पुदीने की ताज़ी खुशबू ने मुझे रोक लिया। कल शाम बाज़ार से लाई गई हरी पत्तियां अभी भी नमी से भरी...
आज सुबह पांच बजे अलार्म बजा, लेकिन मैं छह बजे उठा। कल रात की कसरत के बाद पैरों में हल्का दर्द था, और मैंने सोचा कि थोड़ा...
आज सुबह जब मैं अपनी खिड़की से बाहर देख रही थी, तो सूरज की पहली किरणें पुरानी इमारत की दीवार पर पड़ रही थीं। उस गर्म, सुन...
आज सुबह खिड़की खोलते समय मुझे हवा में गुलमोहर की हल्की खुशबू आई। अजीब बात है कि मैं पिछले तीन दिनों से उसी रास्ते से गुज...
आज सुबह एक बच्चे ने मुझसे पूछा, "आसमान नीला क्यों होता है?" मैंने सोचा था कि जवाब आसान है, लेकिन जब मैंने समझाना शुरू कि...
आज सुबह मेरे फोन में 47 ऐप्स थे, लेकिन रोज़ सिर्फ 8-10 ही इस्तेमाल करता हूं। बाकी सब बस जगह घेर रहे थे और हर बार कुछ खोज...
आज सुबह खिड़की के पास बैठे हुए मैंने देखा कि पुरानी आम की डाली पर एक कौआ बैठा था। वह कुछ देर तक चुपचाप रहा, फिर अचानक उड...
आज सुबह साढ़े पाँच बजे अलार्म बजा, लेकिन मैं छह बजे तक बिस्तर में ही रहा। खिड़की से आती हल्की ठंडी हवा और चिड़ियों की आव...
आज सुबह पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमते हुए एक अजीब सी बात देखी। चांदनी चौक के पास एक छोटी सी चाय की दुकान पर रुका, जह...
आज सुबह चाय की दुकान पर बैठे हुए मैंने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने पोते को किताब पढ़कर सुना रहे थे। उनकी आवाज़ में ए...
आज सुबह जब मैंने काली दाल को भिगोए हुए बर्तन का ढक्कन खोला, तो उस गीली दाल की मिट्टी जैसी महक ने मुझे दादी की रसोई में प...
आज सुबह की धूप कुछ अलग तरह से खिड़की से आ रही थी—तिरछी, सुनहरी, और थोड़ी संकोची। मैं उस छोटी गैलरी की ओर बढ़ा जो शहर के...
आज सुबह ऑफिस जाते समय मेट्रो में एक युवक को देखा—शायद पच्चीस-छब्बीस का होगा। फटी हुई जींस, ब्रांडेड टी-शर्ट, और हाथ में...
आज सुबह चाय बनाते समय मैंने देखा कि पानी उबलने की आवाज़ हमेशा एक जैसी नहीं होती। कभी धीमी सी सरसराहट, कभी तेज़ बुलबुले।...