आज सुबह अपने बैंक स्टेटमेंट को देखते हुए एक अजीब सी बेचैनी महसूस हुई। पिछले तीन महीनों में खर्च बढ़ गया है, लेकिन आमदनी...
आज सुबह अपने बैंक स्टेटमेंट को देखते हुए एक अजीब सी बेचैनी महसूस हुई। पिछले तीन महीनों में खर्च बढ़ गया है, लेकिन आमदनी...
आज सुबह की धूप कुछ अलग थी—खिड़की से आती सुनहरी किरणें रसोई की दीवार पर नाच रही थीं। मैंने सोचा कि आज कुछ पुराना बनाऊं, क...
आज सुबह चाय बनाते समय खिड़की से बाहर देखा तो एक पुरानी इमारत की दीवार पर धूप की किरणें तिरछी पड़ रही थीं। पत्थर की बनावट...
आज सुबह खिड़की से आती धूप में एक अजीब सा नारंगी रंग था—शायद धुंध की वजह से, या शायद मार्च की इस धूप में कुछ खास ही है। म...
आज सुबह मैंने अपना फ़ोन साइलेंट मोड में रखकर जगा। पहली बार मुझे alarm की जगह खिड़की से आती धुंधली रोशनी ने जगाया। यह छोट...
आज सुबह बाज़ार गई तो ताज़ा हरी मेथी देखकर रुक गई। पत्तियाँ इतनी कोमल और चमकदार थीं कि हाथ अपने आप उनकी ओर बढ़ गया। दुकान...
आज शुक्रवार की सुबह कुछ अलग थी। सोचा था कि नए इलाके की गलियों में घूमूंगा, पर पैर अपने आप पुराने बाज़ार की तरफ मुड़ गए।...
आज सुबह खिड़की के बाहर कौओं की आवाज़ सुनते हुए मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी जल्दी में थी। चाय बनाते समय भी मेरा मन अगले घ...
सुबह की धूप खिड़की से आई तो मैंने देखा—धूल के कण हवा में तैर रहे थे, जैसे किसी अनकही कहानी के अक्षर। मैं बिस्तर पर बैठी...
आज सुबह चाय की चुस्की लेते हुए मैंने देखा कि कप में चम्मच टेढ़ा दिख रहा था। बचपन से यही लगता था कि पानी चीज़ों को तोड़ द...
आज सुबह एक बच्चे ने मुझसे पूछा, "आसमान नीला क्यों होता है?" मैंने जवाब देने से पहले पूछा, "तुम्हें क्या लगता है?" उसने त...
आज सुबह ऑफिस जाते समय रिक्शा वाले ने किराया माँगा तो मैंने अपना डिजिटल वॉलेट खोला। बैलेंस देखा तो झटका लगा - पिछले हफ्ते...
आज सुबह की धूप में एक अजीब सुनहरापन था। खिड़की से आती रोशनी दीवार पर ऐसे फैल रही थी जैसे पानी में घुलता केसर। मैंने सोचा...
सुबह साढ़े पांच बजे की ठंडी हवा में पार्क में दौड़ते समय मैंने देखा कि कोहरा अभी भी घास पर जमा था। हर सांस में ठंडक महसू...
आज सुबह छह बजे चांदनी चौक की गलियों में घूमते हुए एक अजीब बात नोटिस की। जैसे ही सूरज की पहली किरणें पुरानी हवेलियों की द...
आज सुबह चाय की चुस्की लेते हुए खिड़की से बाहर देखा तो एक बूढ़ा माली बगीचे में पौधों को पानी दे रहा था। उसकी धीमी, सधी हु...
आज सुबह मैंने अपने पुराने कीबोर्ड को कस्टमाइज़ करने का फ़ैसला किया। दो महीने से सोच रहा था, आख़िरकार हाथ लगाया। पहली बार...
आज सुबह खिड़की से आती धूप में एक अजीब सी नरमी थी। वैसी नहीं जैसी गर्मियों में होती है, बल्कि एक हल्का सा स्पर्श, जैसे को...
आज सुबह छत पर चाय पीते हुए मैंने आसमान की ओर देखा। साफ नीला, बिना बादलों का। मेरे पड़ोसी की बेटी ने पूछा, "अंकल, आसमान न...
आज सुबह बाज़ार में खरीदी गई हरी मिर्च की महक रसोई में घंटों बाद भी तैर रही थी। मैंने उन्हें धोते हुए देखा—छोटी, कड़क, और...