आज सुबह चाय बनाते समय एक अजीब बात नोटिस की। पानी उबल रहा था और मैं बस उसे देख रहा था—बुलबुले बनते, फूटते, फिर नए बनते। अ...
आज सुबह चाय बनाते समय एक अजीब बात नोटिस की। पानी उबल रहा था और मैं बस उसे देख रहा था—बुलबुले बनते, फूटते, फिर नए बनते। अ...
आज सुबह खिड़की के पास बैठी थी, और धूप की एक पतली रेखा मेरे कागज़ों पर गिर रही थी। बाहर कोई चिड़िया बार-बार एक ही सुर में...
आज सुबह की सैर में मैं पुराने बाज़ार की गलियों से होकर गुज़र रहा था। हवा में गरम चाय और तले हुए समोसों की खुशबू तैर रही...
आज सुबह 5:30 बजे उठा, लेकिन कुछ अलग था। खिड़की से आती ठंडी हवा में एक हल्की गीली मिट्टी की खुशबू थी—शायद रात को बारिश हु...
आज सुबह ऑफिस जाते समय रिक्शे में बैठकर मैंने अपने खर्चों की सूची देखी। पिछले महीने की तुलना में इस महीने 4,000 रुपये ज्य...
आज सुबह चाय बनाते समय ध्यान दिया कि पानी उबलने की आवाज़ हर दिन अलग लगती है। कभी धीमी गुड़गुड़ाहट, कभी तेज़ सीटी जैसी। पर...
आज सुबह चाय बनाते समय एक दिलचस्प बात देखी। चीनी के दाने कप में डाले, और बिना चम्मच घुमाए भी वे धीरे-धीरे घुलने लगे। क्या...
आज सुबह छह बजे उठा, लेकिन मोबाइल पर दस मिनट बर्बाद किए। यह गलती रोज़ नहीं होनी चाहिए। जब तक सुबह की पहली घंटे में फ़ोन न...
आज सुबह की धूप खिड़की से आई और मेज़ पर पड़ी पुरानी किताब के पन्नों को सुनहरा कर गई। उस रोशनी में मुझे अचानक याद आया कि क...
आज सुबह छह बजे घर से निकला तो गली के नुक्कड़ पर चाय वाले भैया पहले से ही अपना स्टॉल लगा चुके थे। उनकी केतली से उठती भाप...
सुबह की धूप खिड़की से आकर मेज़ पर एक तिरछी रेखा खींच रही थी। मैं कॉफी का कप हाथ में लिए बैठी थी, और सोच रही थी कि कल रात...
आज सुबह पांच बजे की अलार्म बजी, लेकिन उठने में थोड़ा संघर्ष हुआ। कल की लेग-डे की वजह से शरीर में अभी भी हल्का दर्द था। फ...
आज सुबह रसोई में धूप की पतली किरण सीधे मसाले के डिब्बे पर पड़ रही थी। हल्दी की चमक सोने जैसी लग रही थी। मैंने सोचा कि आज...
आज सुबह जब मैंने बाजार से ताजी पालक की गड्डी उठाई, तो उसकी पत्तियों पर अभी भी ओस की बूंदें चमक रही थीं। हरे रंग की वह गह...
आज सुबह छह बजे निकल पड़ा था पुरानी दिल्ली की गलियों में। सर्दी अभी भी हवा में थी, पर धूप की पहली किरणें जामा मस्जिद की म...
सुबह की धूप खिड़की से आई तो देखा, मेज़ पर कल रात का अधूरा पन्ना अब भी खुला पड़ा था। शब्द वहीं रुके हुए थे, जैसे किसी ने...
आज सुबह खिड़की के पास बैठे हुए मैंने देखा कि धूप कैसे धीरे-धीरे कमरे में फैल रही थी। पहले एक पतली रेखा, फिर एक चौकोर टुक...
आज सुबह एक छात्र ने पूछा, "सर, क्या गर्मी और तापमान एक ही चीज़ हैं?" मैंने मुस्कुराते हुए कहा, "बिल्कुल नहीं, और यही वह...
आज सुबह खिड़की से छनकर आती धूप में एक अजीब सी सुनहरी रंगत थी। शायद बारिश के बाद की नमी ने हवा को कुछ अलग बना दिया था। चा...
आज सुबह बाजार से लौटते समय एक पुरानी दुकान के बाहर तांबे के बर्तनों का ढेर देखा। धूप में वे चमक रहे थे, और उनकी गोलाई मे...