आज सुबह चाय की चुस्की लेते हुए मैंने देखा कि कप में चम्मच टेढ़ा दिख रहा था। बचपन से यही लगता था कि पानी चीज़ों को तोड़ देता है या मोड़ देता है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है - यह प्रकाश का अपवर्तन है, वस्तु का विकृतीकरण नहीं।
जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है - जैसे हवा से पानी में - तो उसकी गति बदल जाती है। यह गति परिवर्तन प्रकाश की दिशा को मोड़ देता है। हमारा मस्तिष्क सीधी रेखा में सोचता है, इसलिए हमें चम्मच टूटा हुआ दिखता है, हालांकि वह बिल्कुल सही-सलामत है।
मैंने एक छोटा प्रयोग किया। पहले खाली गिलास में चम्मच डाला - सीधा दिखा। फिर धीरे-धीरे पानी डाला और देखा कि विकृति कब शुरू होती है। जिस क्षण पानी की सतह चम्मच को छूती है, झुकाव दिखाई देने लगता है। कितना सटीक है प्रकृति का गणित!